तांदुला नदी को बचाने प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, अतिक्रमण हटाने मैदान में उतरी टीम

बालोद जिले में तांदुला नदी को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। ग्राम सिवनी और देउरतराई क्षेत्र में नदी किनारे किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम सुबह से अभियान चला रही है। लगभग साढ़े सात एकड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा रहा है।

May 24, 2026 - 11:11
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तांदुला नदी को बचाने प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, अतिक्रमण हटाने मैदान में उतरी टीम

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l बालोद जिले की जीवनदायिनी तांदुला नदी को उसके वास्तविक और पुराने स्वरूप में वापस लाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने बड़ी और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। ग्राम सिवनी और देउरतराई क्षेत्र में नदी किनारे किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए रविवार सुबह से राजस्व, पुलिस और जल संसाधन विभाग की संयुक्त टीम मैदान में डटी हुई है। प्रशासन की इस कार्रवाई को तांदुला नदी के अस्तित्व और जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार तहसीलदार द्वारा 14 अतिक्रमणकारियों को 24 घंटे के भीतर कब्जा हटाने का नोटिस जारी किया गया था। तय समय सीमा समाप्त होने के बाद आज सुबह लगभग 05:30 बजे प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। जेसीबी मशीनों की मदद से नदी क्षेत्र में बनाए गए खेतों की मेड़ों को तोड़ा जा रहा है और पूरे इलाके का समतलीकरण किया जा रहा है।

प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक तांदुला नदी की लगभग साढ़े सात एकड़ भूमि पर अवैध कब्जा कर खेती की जा रही थी। अब इन अवैध खेतों को हटाकर नदी के समानांतर समतल बनाया जा रहा है, ताकि इस क्षेत्र में दोबारा जलभराव हो सके और नदी की जलधारण क्षमता बढ़ाई जा सके। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई के बाद तांदुला नदी को उसका पुराना वैभव लौटाने में मदद मिलेगी।

उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले भी प्रशासन द्वारा इस क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की पहल की गई थी, लेकिन खेतों में ग्रीष्मकालीन धान की फसल लगी होने के कारण मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्रवाई रोक दी गई थी। अब फसल कटाई पूरी होने के बाद प्रशासन ने दोबारा अभियान शुरू किया है।

राजस्व विभाग और ड्रोन सर्वे में यह तथ्य सामने आया था कि तांदुला नदी, जिसकी चौड़ाई पहले लगभग 220 मीटर थी, अवैध कब्जों के कारण कई स्थानों पर सिकुड़कर महज 80 से 90 मीटर तक सीमित हो गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि कई अतिक्रमणकारियों के पास अन्य स्थानों पर भी पर्याप्त जमीन मौजूद है। कुछ लोगों द्वारा नदी की जमीन पर अवैध कब्जा कर उसे रेगहा पर देने की बात भी सामने आई है।

प्रशासन का कहना है कि अवैध कब्जों के कारण नदी की जलधारण क्षमता लगातार कम हो रही थी, जिससे पर्यावरण और जल संरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए नदी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्णय लिया गया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक संसाधनों पर अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कार्रवाई के दौरान एसडीएम नूतन कंवर, एसडीओपी बोनिफस एक्का, तहसीलदार आशुतोष शर्मा, नायब तहसीलदार मुकेश गजेंद्र, थाना प्रभारी शिशुपाल सिंह, ट्रैफिक टीआई रविशंकर पाण्डेय, गुण्डरदेही थाना प्रभारी नवीन बोरकर, रक्षित निरीक्षक रेवती वर्मा तथा जल संसाधन विभाग के उप अभियंता विशाल राठौर सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। प्रशासन की यह कार्रवाई क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।