निःस्वार्थ जनसेवा का प्रतीक बना ‘सुर क्लिनिक’, 1976 से चिकित्सा सेवा की कायम मिसाल
पंडरी में 19 अगस्त 1976 को किराए के गैरेज से शुरू हुआ ‘सुर क्लिनिक’ आज अपनी 50वीं वर्षगांठ पर पहुंच गया है। डॉ. सी.एन. सुर ने सीमित संसाधनों में कम शुल्क लेकर मरीजों का उपचार शुरू किया था। दशकों बाद भी उनका सेवाभाव जारी है। कोविड काल में भी उन्होंने नियमित रूप से मरीजों का इलाज किया। पिता कैप्टन डॉ. ताराचरण सुर से मिले सेवा और समर्पण के संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए डॉ. सुर ने चिकित्सा को व्यवसाय के बजाय जनसेवा का माध्यम बनाया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर के पंडरी क्षेत्र में 19 अगस्त 1976 को एक साधारण किराए के गैरेज से शुरू हुआ ‘सुर क्लिनिक’ आज अपनी 50वीं वर्षगांठ पर पहुंच गया है। पांच दशक की इस यात्रा में क्लिनिक ने केवल चिकित्सा सेवा ही नहीं दी, बल्कि जरूरतमंदों के प्रति संवेदना, ईमानदारी और निःस्वार्थ जनसेवा की एक अलग पहचान भी कायम की है। प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. सी.एन. सुर ने सीमित संसाधनों के बीच इस क्लिनिक की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में वे महज 5 से 10 रुपये की फीस लेकर मरीजों का उपचार करते थे और जरूरत के अनुसार अपने हाथों से दवाइयां तैयार करते थे।