भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में भारी इंजीनियरिंग और पूंजीगत वस्तु क्षेत्र की अहम भूमिका: बृजमोहन अग्रवाल
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने नई दिल्ली में प्राक्कलन समिति की बैठक में भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए भारी इंजीनियरिंग और पूंजीगत वस्तु क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ में भारी मशीनरी और खनन उपकरणों के विनिर्माण व मेंटेनेंस हब विकसित करने तथा स्थानीय युवाओं के लिए आधुनिक तकनीकी कौशल केंद्र स्थापित करने के सुझाव दिए।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने नई दिल्ली में संसद की प्राक्कलन समिति की उच्चस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया। बैठक का विषय देश में भारी उपकरण उत्पादन क्षमता की समीक्षा रहा। इस दौरान भारी उद्योग मंत्रालय और पूंजीगत वस्तु क्षेत्र के विकास, उत्पादन क्षमता बढ़ाने, तकनीकी नवाचार तथा भविष्य की औद्योगिक रणनीति को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के विजन को साकार करने में भारी इंजीनियरिंग और पूंजीगत वस्तु उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र देश के खनन, बिजली, निर्माण, ऑटोमोबाइल और रक्षा सहित विभिन्न विनिर्माण क्षेत्रों को आवश्यक मशीनरी उपलब्ध कराता है और औद्योगिक विकास की गति को मजबूत करता है।
उन्होंने बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि अर्थमूविंग, निर्माण एवं खनन मशीनरी क्षेत्र में बीते वर्षों के दौरान उत्पादन और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2020-21 में इस क्षेत्र का उत्पादन 29,021 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 80,750 करोड़ रुपये हो गया। इस अवधि में उत्पादन में 178.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि निर्यात में 274.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
मशीन टूल्स तथा डाई-मोल्ड क्षेत्र के उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2020-21 में 6,602 करोड़ रुपये के उत्पादन वाला यह क्षेत्र वर्ष 2024-25 में बढ़कर 14,286 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं ट्रांसफॉर्मर, बॉयलर और टर्बाइन जैसे भारी विद्युत उपकरणों के उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है और आयात पर निर्भरता में 19.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भारी उद्योग मंत्रालय की ओर से संचालित भारतीय पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता संवर्धन स्कीम के विभिन्न चरणों के माध्यम से देश में तकनीकी क्षमता को मजबूत किया जा रहा है। IIT, IISc, CMTI, ARAI और BHEL जैसे प्रमुख संस्थानों के सहयोग से उत्कृष्ट अनुसंधान केंद्र, कॉमन इंजीनियरिंग फैसिलिटी सेंटर और उद्योग त्वरक विकसित किए गए हैं। इसके माध्यम से 25 से अधिक स्वदेशी तकनीकों का विकास और व्यावसायीकरण किया गया है, जबकि 70 से अधिक बौद्धिक संपदा अधिकार भी दाखिल किए गए हैं।
बैठक में सांसद ने छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव रखे। उन्होंने कहा कि खनिज, ऊर्जा और उद्योग के क्षेत्र में समृद्ध छत्तीसगढ़ में भारी मशीनरी तथा आधुनिक खनन उपकरणों के विनिर्माण और रखरखाव के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं। राज्य में भारी मशीनरी और खनन उपकरणों का आधुनिक विनिर्माण एवं मेंटेनेंस हब विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री 4.0 और आधुनिक तकनीक के दौर में स्थानीय युवाओं को उच्चस्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराना जरूरी है। इसके लिए छत्तीसगढ़ में आधुनिक कौशल प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाने चाहिए, ताकि युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।
बृजमोहन अग्रवाल ने विश्वास जताया कि प्राक्कलन समिति की ओर से तैयार किए जाने वाले नीतिगत सुझाव भारत को भारी उपकरण विनिर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति दिलाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। उन्होंने कहा कि देश में विनिर्माण क्षमता के विस्तार, स्वदेशी तकनीक के विकास, रोजगार सृजन और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने से आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को नई मजबूती मिलेगी।