सुकमा में नक्सल प्रतीकों पर बड़ा प्रहार, एट्टापारा में नक्सली स्मारक ध्वस्त
सुकमा जिले के एट्टापारा (गोगुंडा) क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर नक्सली स्मारक ध्वस्त किया। कार्रवाई में ग्रामीणों ने भी सुरक्षा बलों का सहयोग किया, जिससे क्षेत्र में नक्सल प्रभाव कम होने का संकेत मिला है।
UNITED NEWS OF ASIA. रीजेंट गिरी, सुकमा। नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सुरक्षा बलों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नक्सली प्रभाव और प्रतीकों पर निर्णायक प्रहार किया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 74वीं वाहिनी और कोबरा टीम ने संयुक्त कॉम्बिंग एंड सर्च ऑपरेशन के दौरान एट्टापारा (गोगुंडा) क्षेत्र में बने नक्सली स्मारक को ध्वस्त कर दिया।
जानकारी के अनुसार यह संयुक्त ऑपरेशन केरलापाल थाना क्षेत्र अंतर्गत एट्टापारा इलाके में खुफिया सूचना के आधार पर चलाया गया। सुरक्षा बलों ने सुबह करीब साढ़े पांच बजे दुर्गम और घने जंगलों वाले क्षेत्र में रणनीतिक घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। तलाशी के दौरान वर्ष 2021 में बनाया गया नक्सली स्मारक मिला, जिसे सीपीआई (माओवादी) संगठन के सदस्यों मुचाकी मासे, राबा सिगा और पोडियम हिड़मा की याद में बनाया गया था।
सुरक्षा बलों ने स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से सुबह करीब सवा छह बजे स्मारक को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई को नक्सली प्रभाव और भय की मानसिक पकड़ को तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि अब क्षेत्र में नक्सलियों का डर कम हो रहा है और लोग सुरक्षा बलों के साथ खुलकर सहयोग कर रहे हैं।
हिमांशु पांडेय ने कहा कि नक्सली स्मारक केवल ढांचे नहीं बल्कि डर और प्रभाव के प्रतीक होते हैं। इन्हें ध्वस्त करना नक्सल विचारधारा को जड़ से समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों का सहयोग इस बात का संकेत है कि सुकमा अब शांति और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार नक्सली स्मारक स्थानीय ग्रामीणों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने और संगठन की मौजूदगी दर्शाने का माध्यम होते हैं। ऐसे प्रतीकों के जरिए नक्सली संगठन युवाओं को प्रभावित करने और क्षेत्र में अपना नियंत्रण दिखाने की कोशिश करते हैं।
एट्टापारा (गोगुंडा) क्षेत्र में नक्सली स्मारक को ध्वस्त करना जिले के नक्सल मुक्त भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि अब हिंसा और भय के प्रतीकों के लिए इस क्षेत्र में कोई स्थान नहीं है। सुरक्षा बलों के अनुसार सुकमा अब धीरे-धीरे उस दौर से बाहर निकल रहा है, जहां बंदूक और बारूद का असर था, और अब शांति, विकास और विश्वास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।