अवैध वसूली के मकड़जाल में फंसी सुकमा नगरपालिका, राजवाड़ा माता मेला स्थल में मीना बाजार अनुमति पर गंभीर आरोप

सुकमा जिले के राजवाड़ा माता मेला स्थल में मीना बाजार लगाने की अनुमति को लेकर नगर पालिका पर अवैध वसूली और दोहरी अनुमति देने के गंभीर आरोप लगे हैं। मीना बाजार संचालक ने बिना रसीद अतिरिक्त राशि वसूली का आरोप लगाते हुए कलेक्टर सुकमा को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की जांच और राशि वापसी की मांग की है।

Jan 30, 2026 - 14:05
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अवैध वसूली के मकड़जाल में फंसी सुकमा नगरपालिका, राजवाड़ा माता मेला स्थल में मीना बाजार अनुमति पर गंभीर आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. भूपेंद्र साहू, कोरबा | सुकमा  नगर पालिका एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। पहले गुप्त निविदा और अपने खास लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोपों की जांच चल ही रही थी, अब राजवाड़ा माता मेला स्थल में मीना बाजार लगाने वालों से कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। इस संबंध में मीना बाजार संचालक मुन्नवर शरीफ ने जिला कलेक्टर सुकमा को लिखित शिकायत सौंपते हुए नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

शिकायत के अनुसार, राजवाड़ा माता मेला स्थल को पहले छोटा बताते हुए केवल एक ही मीना बाजार लगाने की अनुमति दी जा सकती है, ऐसा कहकर नगर पालिका द्वारा अनुमति दी गई थी। संचालक का कहना है कि अनुमति के लिए संपर्क करने पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा 2.50 लाख रुपये नगर पालिका में जमा कर रसीद कटवाने की बात कही गई थी, जिसे उन्होंने नियमानुसार जमा भी कर दिया।

लेकिन आरोप है कि इसके बाद तीन व्यक्तियों के माध्यम से 1.10 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि बिना किसी रसीद के दिलवाई गई। संचालक का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया के बाद 22 जनवरी को उन्हें मीना बाजार लगाने का अनुमति पत्र जारी किया गया।

मामला उस समय और संदिग्ध हो गया जब उसी मेला स्थल में 28 जनवरी को किसी अन्य व्यक्ति को भी मीना बाजार लगाने की अनुमति दे दी गई। पहले से अनुमति प्राप्त संचालक द्वारा जब इस दोहरी अनुमति को लेकर सवाल उठाए गए, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया और बातचीत से भी बचते रहे।

अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि यदि मेला स्थल छोटा था और केवल एक ही मीना बाजार लगाने की अनुमति दी जा सकती थी, तो फिर दूसरी अनुमति किस आधार पर दी गई। वहीं यदि दो मीना बाजार लगाने की गुंजाइश थी, तो पहले संचालक से यह तथ्य क्यों छिपाया गया।

संचालक मुन्नवर शरीफ का कहना है कि दो मीना बाजार लगने से दोनों पक्षों को भारी आर्थिक नुकसान होना तय है। इसी कारण उन्होंने मेला स्थल में मीना बाजार न लगाने का निर्णय लिया है और जमा कराई गई कुल 3.60 लाख रुपये की वापसी की मांग की है। खास बात यह है कि 1.10 लाख रुपये की कथित अतिरिक्त राशि की कोई आधिकारिक रसीद उपलब्ध नहीं है, जिसे उन्होंने सीधे तौर पर धोखाधड़ी करार दिया है।

नगर पालिका द्वारा जारी अनुमति पत्र में अग्निशमन व्यवस्था, बिजली, सुरक्षा और समय-सीमा जैसी शर्तों का उल्लेख तो है, लेकिन अतिरिक्त राशि और दूसरी अनुमति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

अब राजवाड़ा माता मेला स्थल केवल आस्था और मनोरंजन का केंद्र नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करने वाला मामला बन गया है। जिलेभर की निगाहें अब जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि इस शिकायत की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाती है या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।