2018 में कथित सांठगांठ से बाहरी लोगों को दिलाया गया पट्टा, पांच खसरों की जमीन विवादों में

सुकमा जिले की चिंतलनार ग्राम पंचायत के आश्रित गांवों में आदिवासियों की पैतृक कृषि भूमि पर वर्ष 2018 में कथित सांठगांठ के जरिए बाहरी लोगों को पट्टा दिए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच और पट्टों को निरस्त करने की मांग की है।

Feb 17, 2026 - 11:13
Feb 17, 2026 - 11:29
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2018 में कथित सांठगांठ से बाहरी लोगों को दिलाया गया पट्टा, पांच खसरों की जमीन विवादों में

UNITED NEW OF ASIA . रिजेंट गिरी, सुकमा । सुकमा जिले की चिंतलनार ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम मरकागुड़ा, रेवालीपारा, लच्छीपारा, डिपोपारा, कोननगुड़ा और रावगुड़ा में आदिवासियों की पैतृक कृषि भूमि पर अवैध कब्जे और फर्जी पट्टा जारी किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। सोमवार को तीन दर्जन से अधिक पीड़ित आदिवासी ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर वर्ष 2018 में कथित सांठगांठ के जरिए बाहरी लोगों को पट्टा दिलाए जाने का आरोप लगाया है।

ग्रामीणों ने बताया कि वे अपने पूर्वजों के समय से उक्त भूमि पर काबिज होकर खेती करते आ रहे हैं, इसके बावजूद कुछ बाहरी व्यक्तियों द्वारा राजस्व अमले से मिलीभगत कर उनके कब्जे की भूमि पर पट्टा हासिल कर लिया गया।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार राहुल सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह (पिता – दल बहादुर सिंह) तथा राम बहादुर सिंह द्वारा वर्ष 2018 में कथित रूप से अवैध तरीके से पट्टा प्राप्त किया गया। विवादित भूमि के खसरा नंबर 704, 705, 714/1, 714/2 एवं 715 बताए गए हैं।

पीड़ित ग्रामीणों – बारसे भीमा, कोरसा सिंगा, तामु गंगा, वंजाम देवा, कोरसा भीमा सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि पट्टा जारी करने की प्रक्रिया में दस्तावेजों में हेरफेर कर छलपूर्वक कार्रवाई की गई। इस संबंध में पूर्व में भी प्रशासन को अवगत कराया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर अमित कुमार ने पीड़ितों को आश्वस्त किया कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और इसके लिए कोंटा के एसडीएम से जांच कराई जाएगी।

इस अवसर पर बस्तरिया राज मोर्चा के संभागीय संयोजक मनीष कुंजाम, रामा सोढ़ी और हड़मा मड़कम भी उपस्थित रहे।

पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने कहा कि क्षेत्र में आदिवासियों की जमीन को फर्जी तरीके से रजिस्ट्री और पट्टा किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर से की गई है और कलेक्टर ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध विधिवत कार्रवाई की जाएगी।

कुंजाम ने यह भी कहा कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती है तो आगे चलकर ठोस कदम उठाया जाएगा।

पीड़ित आदिवासी परिवारों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अवैध रूप से बनाए गए सभी पट्टों को तत्काल निरस्त किया जाए तथा फर्जीवाड़े में शामिल लोगों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।