आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल ने बदली दिव्यांग हरिचंद पटेल की जिंदगी
कबीरधाम जिले के ग्राम गांगचुवा निवासी हरिचंद पटेल ने शासन की मदद से अपनी दिव्यांगता को मात दी है। समाज कल्याण विभाग से मिली बैटरी चलित ट्राइसाइकिल ने उन्हें न केवल गति दी, बल्कि किराना व्यवसाय के जरिए आत्मनिर्भर भी बनाया।
UNITED NEWS OF ASIA. कबीरधाम | जिले से एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है, जहाँ शासन की योजना ने एक व्यक्ति के जीवन के अंधकार को आत्मविश्वास की रोशनी में बदल दिया। ग्राम गांगचुवा (सिंघनपुरी) के निवासी हरिचंद पटेल, जो एक सड़क दुर्घटना में अपना बायां पैर खो चुके थे, आज समाज के लिए स्वावलंबन की मिसाल बन गए हैं।
हादसे से संघर्ष तक का सफर
एक सड़क दुर्घटना ने हरिचंद की जिंदगी की रफ्तार थाम दी थी। एक पैर से दिव्यांग होने के कारण उनके लिए दैनिक कार्य करना और परिवार का भरण-पोषण करना एक बड़ी चुनौती बन गया था। आर्थिक तंगी और आवागमन की समस्या ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान कर दिया था।
शासन की योजना और विभाग का साथ
इलाज के दौरान हरिचंद को जिला अस्पताल से दिव्यांगता प्रमाण पत्र की जानकारी मिली। प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद उन्होंने समाज कल्याण विभाग में बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल के लिए आवेदन किया। विभाग द्वारा पात्रता जांच के उपरांत उन्हें ट्राइसाइकिल प्रदान की गई, जो उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई।
अब खुद चला रहे हैं किराना दुकान
मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल मिलने के बाद हरिचंद की निर्भरता दूसरों पर खत्म हो गई है:
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आसान आवागमन: अब वे बिना किसी की मदद के लंबी दूरी तय कर सकते हैं।
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स्वरोजगार: उन्होंने अपने गांव में एक छोटी किराना दुकान शुरू की है।
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आत्मनिर्भरता: दुकान का सामान लाने और ले जाने का काम वे स्वयं अपनी ट्राइसाइकिल की मदद से करते हैं।
हरिचंद पटेल ने भावुक होते हुए शासन और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "इस ट्राइसाइकिल ने मुझे सिर्फ पहिए नहीं दिए, बल्कि सम्मान से जीने का जरिया भी दिया है।"