नेत्रदान को बढ़ावा देने अम्बेडकर अस्पताल में राज्य स्तरीय कार्यशाला, 100 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को मिला प्रशिक्षण

रायपुर के डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय में नेत्रदान प्रक्रियाओं पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें प्रदेश के 32 जिलों से आए 100 से अधिक नेत्र सहायक अधिकारियों और सहायक नेत्रदान अधिकारियों को नेत्रदान की काउंसलिंग, कॉर्निया प्राप्ति, संरक्षण, परिवहन और दस्तावेजीकरण की व्यावहारिक जानकारी दी गई। राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े से पहले आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को अधिक प्रभावी ढंग से नेत्रदान के लिए लोगों को प्रेरित करने और संभावित दाताओं के परिवारों की काउंसलिंग के लिए तैयार करना रहा।

Aug 24, 2026 - 12:58
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नेत्रदान को बढ़ावा देने अम्बेडकर अस्पताल में राज्य स्तरीय कार्यशाला, 100 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को मिला प्रशिक्षण

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l प्रदेश में नेत्रदान को बढ़ावा देने और इससे जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। क्षेत्रीय नेत्र अनुसंधान संस्थान और पं. जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के नेत्र रोग विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यशाला का विषय “नेत्रदान प्रक्रियाओं पर नवीनतम जानकारी” रखा गया। कार्यक्रम में प्रदेश के 32 जिलों से 100 से अधिक नेत्र सहायक अधिकारियों और सहायक नेत्रदान अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े से पहले किया गया, ताकि प्रदेश में नेत्रदान से जुड़ी गतिविधियों को गति दी जा सके। प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को संभावित नेत्रदाताओं की पहचान करने से लेकर उनके परिवार से संवाद, काउंसलिंग और नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को डोनर चयन, मेडिकल स्क्रीनिंग, कॉर्निया प्राप्त करने की तकनीक, ऊतक संरक्षण, कोल्ड चेन और सुरक्षित परिवहन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला में केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को एन्यूक्लिएशन, इन-सिटू कॉर्नियोस्क्लेरल रिम प्राप्त करने और उसके संरक्षण की प्रक्रिया के बारे में वीडियो डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से जानकारी दी गई। इसके अलावा काउंसलिंग, दस्तावेजीकरण और मॉइस्ट चैंबर तैयार करने की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की गई। वास्तविक मामलों पर चर्चा, इंटरैक्टिव क्विज और रोल प्ले के जरिए स्वास्थ्यकर्मियों को कठिन परिस्थितियों में परिवारों से संवेदनशील तरीके से संवाद करने का अभ्यास कराया गया।

प्रशिक्षण के दौरान कन्सेंट फॉर्म, डेथ सर्टिफिकेट और आई बैंक रिकॉर्ड्स सहित आवश्यक दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया भी समझाई गई। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया में सावधानी, संवेदनशीलता और निर्धारित प्रोटोकॉल के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया।

यह पहल स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल द्वारा प्रदेश में नेत्रदान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर दिए गए जोर के बाद आगे बढ़ाई गई। कार्यशाला के आयोजन में चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी के मार्गदर्शन और डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर के व्यवस्थागत सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

आयोजकों के अनुसार नेत्रदान की सफलता में चिकित्सकों के साथ नेत्र सहायक अधिकारियों और सहायक नेत्रदान अधिकारियों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। यही स्वास्थ्यकर्मी संभावित दाता की पहचान, परिवार से संपर्क, काउंसलिंग, नेत्र प्राप्ति, संरक्षण और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया में अहम जिम्मेदारी निभाते हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से उनके ज्ञान और कौशल को मजबूत करने का प्रयास किया गया।

कार्यशाला का समापन पोस्ट-टेस्ट और प्रतिभागियों से प्राप्त फीडबैक के साथ हुआ। राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े से पहले आयोजित यह प्रशिक्षण प्रदेश में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और स्वास्थ्यकर्मियों को बेहतर तरीके से तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कार्यशाला का संदेश रहा कि नेत्रदान के माध्यम से किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में दृष्टि और आशा का नया उजाला लाया जा सकता है।