वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन कर आत्मनिर्भर बने युवा किसान विनय चंद्रवंशी, पीएम मत्स्य संपदा योजना से मिली नई पहचान
कवर्धा जिले के युवा किसान विनय चंद्रवंशी ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ लेकर वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन शुरू किया और लाखों रुपये की आय अर्जित कर आत्मनिर्भरता की मिसाल बने। उनकी सफलता क्षेत्र के युवाओं को प्रेरित कर रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। जब सही सरकारी योजना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और निरंतर मेहनत एक साथ मिलती है, तब सफलता की राह अपने आप खुल जाती है। कवर्धा विकासखंड के ग्राम भानपुर निवासी युवा किसान श्री विनय चंद्रवंशी ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ लेकर वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन शुरू किया और आज आत्मनिर्भरता की एक सशक्त मिसाल बन चुके हैं।
स्नातक शिक्षित विनय चंद्रवंशी ने परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक और लाभकारी व्यवसाय के रूप में मत्स्य पालन को अपनाने का निर्णय लिया। उन्होंने अपनी निजी भूमि पर मछली तालाब निर्माण के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत आवेदन किया। सभी आवश्यक जांच, प्रक्रियाओं और स्वीकृति के बाद उनका चयन किया गया। इस परियोजना में कुल 7 लाख रुपये की लागत आई, जिसमें से 2.80 लाख रुपये की अनुदान राशि उन्हें डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से प्राप्त हुई।
तालाब निर्माण के पश्चात मत्स्य पालन विभाग, कबीरधाम द्वारा उन्हें वैज्ञानिक मछली पालन का प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और नियमित निगरानी प्रदान की गई। विभाग द्वारा पहले वर्ष मछली बीज के साथ 3,000 रुपये मूल्य का मछली आहार भी उपलब्ध कराया गया, जिससे उत्पादन की मजबूत शुरुआत हुई। वैज्ञानिक तरीके से तालाब प्रबंधन, आहार नियंत्रण और जल गुणवत्ता पर ध्यान देने का परिणाम यह रहा कि मछली उत्पादन में निरंतर वृद्धि हुई।
शासन के सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर विनय चंद्रवंशी ने वर्ष 2023-24 में पंगेसियस मछली पालन से लगभग 4.60 लाख रुपये की आय अर्जित की। अब तक वे लगभग 42 टन मछली का उत्पादन कर चुके हैं। इस आय से वे न केवल अपने परिवार का बेहतर ढंग से भरण-पोषण कर रहे हैं, बल्कि भविष्य में मत्स्य पालन के विस्तार की भी योजना बना रहे हैं।
उनकी सफलता से आसपास के ग्रामीणों और युवा किसानों में भी मत्स्य पालन के प्रति रुचि बढ़ी है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र का समग्र विकास, रोजगार के अवसर सृजित करना और किसानों व मछुआरों की आय बढ़ाना है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आजीविका का मजबूत आधार बनकर उभर रही है, और विनय चंद्रवंशी जैसे उदाहरण इसकी सफलता को साकार रूप दे रहे है