मंत्री रामविचार नेताम ने केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात, मक्का और दलहन के लिए 30.42 करोड़ की स्वीकृति
छत्तीसगढ़ के कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने नई दिल्ली में केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर मक्का और दलहन फसलों के प्रोत्साहन हेतु 30.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त की। इससे राज्य में 55 हजार हेक्टेयर मक्का और 24 हजार 100 हेक्टेयर दलहन फसल प्रदर्शन होगा।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। छत्तीसगढ़ के कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने नई दिल्ली में केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से उनके शासकीय निवास कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। इस बैठक में राज्य में मक्का और दलहन-तिलहन फसलों के विकास से जुड़ी प्रमुख मांगों पर चर्चा की गई।
मंत्रीनेताम ने केन्द्रीय मंत्री को राज्य की कृषि जरूरतों और किसानों के हित में उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर केन्द्रीय स्तर से स्वीकृति प्रदान की गई। इसके तहत मक्का फसल प्रोत्साहन के लिए 6.32 करोड़ और दलहन-तिलहन फसलों के प्रोत्साहन के लिए 24.10 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। कुल 30.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति से राज्य के किसानों को नई ताकत मिलेगी।
स्वीकृति के अनुसार मक्का फसल का प्रदर्शन लगभग 55 हजार हेक्टेयर में होगा, जिससे लगभग 7 हजार किसान लाभान्वित होंगे। वहीं, दलहन फसलों के अंतर्गत उड़द और मूंग के प्रदर्शन के लिए 24 हजार 100 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया गया है, जिससे लगभग 28 हजार किसान लाभान्वित होंगे।
मंत्री रामविचार नेताम ने केन्द्रीय मंत्री से कृषि विकास, आधुनिक कृषि उपकरणों, परंपरागत कृषि विकास योजना और लंबित स्वीकृतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2025-26 के लिए 27.68 करोड़ का प्रस्ताव कृषि मंत्रालय को स्वीकृति हेतु भेजा गया है। इसके अलावा उन्होंने लंबित प्रस्तावों की त्वरित स्वीकृति का आग्रह भी किया।
कृषि मंत्री नेताम ने इसे राज्य के किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि केन्द्र-राज्य समन्वय से मक्का और दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे किसानों की आय में सुधार और कृषि क्षेत्र का समग्र विकास संभव होगा।
यह पहल राज्य में कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने, किसान कल्याण सुनिश्चित करने और खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है। इस स्वीकृति से छत्तीसगढ़ में कृषि अनुसंधान और फसल प्रदर्शन को नई दिशा मिलेगी।