रामानुजगंज में पशु चिकित्सा विभाग पर कमीशनखोरी के आरोप, वायरल ऑडियो से बढ़ा विवाद
बलरामपुर जिले के रामानुजगंज विकासखंड में पशु चिकित्सा विभाग पर कमीशनखोरी के आरोप लगे हैं। एक वायरल ऑडियो क्लिप के सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज विकासखंड में पशु चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। एक वायरल ऑडियो क्लिप के जरिए कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के आरोपों ने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, विकासखंड में पदस्थ एक कर्मचारी द्वारा गौ-सेवकों से उनके मानदेय के बदले कथित रूप से कमीशन की मांग किए जाने की बात सामने आई है। वायरल ऑडियो में कथित तौर पर यह कहा जा रहा है कि अन्य कार्यकर्ता अपना हिस्सा दे चुके हैं और भुगतान प्राप्त होने के बाद एक निश्चित प्रतिशत राशि वरिष्ठ अधिकारी के लिए देने की अपेक्षा की जा रही है।
इस ऑडियो के सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं का आरोप है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों के कारण विभाग में पारदर्शिता की कमी आई है। उनका कहना है कि कृत्रिम गर्भाधान (AI) और टीकाकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में लगे निजी कार्यकर्ताओं को कई बार भुगतान प्रक्रिया में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कार्यकर्ताओं का दावा है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में दिन-रात मेहनत कर पशुपालन विभाग की योजनाओं को धरातल पर उतारते हैं, लेकिन उन्हें समय पर और पूर्ण भुगतान नहीं मिल पाता। कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि बिना किसी प्रकार के “हिस्से” के भुगतान में देरी या अन्य बाधाएं उत्पन्न होती हैं।
हालांकि, इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक स्तर पर भी जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल विभागीय व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है, बल्कि इससे जमीनी स्तर पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं का मनोबल भी प्रभावित होता है। पशुपालन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों और कार्यकर्ताओं के बीच विश्वास और पारदर्शिता बेहद जरूरी होती है।
स्थानीय गौ-सेवकों और AI कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि कार्यकर्ताओं के भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।
फिलहाल, बलरामपुर जिले का यह मामला चर्चा में है और सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष इस पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करेंगे।