ऐतिहासिक कवि सम्मेलन के साथ दो दिवसीय राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026 का भव्य समापन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026 का समापन ऐतिहासिक कवि सम्मेलन के साथ हुआ। महोत्सव में सांस्कृतिक, धार्मिक और साहित्यिक आयोजनों के साथ क्षेत्र के विकास को लेकर मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | त्याग, तपस्या और धर्मपरायणता के प्रतीक महान राजा मोरध्वज की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026 का भव्य समापन शुक्रवार को ऐतिहासिक कवि सम्मेलन के साथ गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। श्रद्धा, संस्कृति और साहित्य के अद्भुत संगम ने आरंग को उत्सवमय बना दिया।
महोत्सव के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, आयोजन के संयोजक कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब सहित अनेक मंत्री, सांसद, विधायक, धर्मगुरु एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम से पूर्व सभी अतिथियों ने बाबा बागेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि आरंग की पुण्यभूमि त्रेता युग में प्रभु श्रीराम और द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण की स्मृतियों से अनुप्राणित रही है। उन्होंने राजा मोरध्वज को त्याग, सत्य और जनकल्याण की जीवंत परंपरा का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास को गति देने हेतु कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने समोदा उप तहसील को पूर्ण तहसील का दर्जा देने, पूर्णकालिक तहसीलदार की पदस्थापना तथा राजा मोरध्वज महोत्सव के शासकीय अनुदान को ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख करने की घोषणा की। साथ ही खेल परिसर सहित अन्य अधोसंरचना विकास कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने का आश्वासन दिया।
महोत्सव के दूसरे दिन धार्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक कार्यक्रमों की श्रृंखला चली। सुबह गायत्री यज्ञ-हवन, दोपहर छात्र-छात्राओं के सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकगाथा लोरीक-चंदा की प्रस्तुति और राजा मोरध्वज की भव्य झांकी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समापन अवसर पर आयोजित ऐतिहासिक कवि सम्मेलन में प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास सहित देश के नामचीन कवियों ने ओज, वीर रस, श्रृंगार और राष्ट्रभाव से परिपूर्ण रचनाएं प्रस्तुत कीं। देर रात तक तालियों की गूंज और भावनाओं का सैलाब इस आयोजन की ऐतिहासिक सफलता का प्रमाण बना।
दो दिवसीय राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026 ने न केवल इतिहास और संस्कृति को जीवंत किया, बल्कि नई पीढ़ी को त्याग, समर्पण और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सार्थक संदेश भी दिया।