रायपुर में 17 वर्षों से हर शनिवार हजारों श्रद्धालुओं के लिए महाभंडारा, सेवा का अनूठा उदाहरण बने कुबेर राठी

रायपुर रेलवे स्टेशन परिसर स्थित श्री सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर में वर्ष 2009 से हर शनिवार विशाल महाभंडारे का आयोजन किया जा रहा है। समाजसेवी कुबेर राठी और उनका परिवार पिछले 17 वर्षों से इस सेवा कार्य को निरंतर संचालित कर रहे हैं, जहां हर सप्ताह 5,000 से 6,000 से अधिक श्रद्धालु महाप्रसाद ग्रहण करते हैं।

Aug 3, 2026 - 10:53
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रायपुर में 17 वर्षों से हर शनिवार हजारों श्रद्धालुओं के लिए महाभंडारा, सेवा का अनूठा उदाहरण बने कुबेर राठी

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित रेलवे स्टेशन परिसर का श्री सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक सद्भाव का भी प्रतीक बन चुका है। वर्ष 2009 से इस मंदिर में प्रत्येक शनिवार आयोजित होने वाला विशाल महाभंडारा हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था और सेवा का अनूठा संगम बन गया है। समाजसेवी कुबेर राठी और उनका परिवार पिछले 17 वर्षों से इस सेवा कार्य को बिना किसी रुकावट के निरंतर आगे बढ़ा रहा है।

मंदिर समिति के संस्थापक कुबेर राठी द्वारा शुरू किए गए इस महाभंडारे में हर शनिवार 5,000 से 6,000 से अधिक श्रद्धालु महाप्रसाद ग्रहण करते हैं। मौसम चाहे कड़ाके की ठंड का हो, तेज गर्मी का या मूसलाधार बारिश का, सेवा का यह सिलसिला कभी नहीं रुका। यही निरंतरता इस आयोजन को रायपुर की धार्मिक और सामाजिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती है।

महाभंडारे की तैयारियां शनिवार सुबह से ही शुरू हो जाती हैं। पहले चरण में कुबेर राठी के कार्यालय परिसर में श्रद्धालुओं को सम्मानपूर्वक बैठाकर भोजन कराया जाता है। इसके बाद शाम होते ही श्री सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर परिसर में महाप्रसाद वितरण प्रारंभ होता है, जो देर रात तक लगातार चलता रहता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।

इस महाभंडारे की सबसे बड़ी विशेषता इसकी समावेशी भावना है। यहां किसी भी प्रकार का जाति, धर्म, वर्ग या समुदाय का भेदभाव नहीं किया जाता। सभी लोग एक साथ बैठकर महाप्रसाद ग्रहण करते हैं। यही कारण है कि यह आयोजन केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक एकता, भाईचारे और सर्वधर्म समभाव का भी सशक्त संदेश देता है।

कुबेर राठी का कहना है कि यह सेवा कार्य उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि हनुमान जी की कृपा और प्रेरणा का परिणाम है। उनके अनुसार, मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और यहां सच्चे मन से आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। उन्होंने कहा कि जब तक प्रभु की इच्छा रहेगी, यह महाभंडारा इसी प्रकार निरंतर चलता रहेगा और जरूरतमंदों तथा श्रद्धालुओं की सेवा करता रहेगा।

रायपुर का यह महाभंडारा आज केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुका है। हर सप्ताह हजारों लोगों तक भोजन पहुंचाने के साथ यह आयोजन समाज में सहयोग, सेवा और मानवता की भावना को भी मजबूत करता है। वर्षों से बिना रुके चल रही यह पहल यह संदेश देती है कि सच्ची सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है और सामूहिक प्रयासों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।