रायपुर साहित्य उत्सव 2026: सुरेंद्र दुबे मंडप में चित्रकला के माध्यम से उभरी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा
रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतर्गत नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित चित्रकला प्रदर्शनी ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और जनजीवन से रूबरू कराया। सुरेंद्र दुबे मंडप में कलाकारों की कृतियों और कार्यशालाओं ने कला व साहित्य के संगम को सजीव किया।
UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा | रायपुर नवा रायपुर, अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आयोजित तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतर्गत सुरेंद्र दुबे मंडप में भव्य चित्रकला प्रदर्शनी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और जनजीवन को रंगों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।
मंडप में प्रवेश करते ही सबसे पहले छत्तीसगढ़ महतारी का भव्य चित्र दर्शकों का ध्यान खींचता है। रायपुर की कलाकार सोनल शर्मा द्वारा निर्मित इस चित्र में महतारी के हाथों में पंडवानी का तंबूरा, हंसिया और धान की बालियां दिखाई गई हैं, जो प्रदेश की कृषि, लोकसंस्कृति और मातृत्व भाव को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करती हैं।
प्रदर्शनी में अवध कंवर द्वारा निर्मित बस्तर के बाजार का चित्र जनजीवन की जीवंतता को दर्शाता है। चित्र को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो बस्तर की गलियों की चहल-पहल, लोकगीत और कविताएं कैनवास पर उतर आई हों। यह कृति दर्शकों को छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन से भावनात्मक रूप से जोड़ती है।
जांजगीर की कलाकार दिव्या चंद्रा द्वारा बनाया गया राजिम कुंभ का चित्र आध्यात्मिक ऊर्जा और तीर्थ की दिव्यता का सजीव अनुभव कराता है। वहीं रामगढ़ की पहाड़ियों पर आधारित चित्र दर्शकों को उस ऐतिहासिक स्थल की अनुभूति कराता है, जहां महाकवि कालिदास ने मेघदूत की रचना की कल्पना की होगी।
चित्रकला प्रदर्शनी के साथ-साथ सुरेंद्र दुबे मंडप में पेंटिंग एवं कार्टून कार्यशाला का भी आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यशालाओं में युवा कलाकारों और विद्यार्थियों को अनुभवी कलाकारों से रेखांकन, रंग संयोजन, भाव-प्रस्तुति और सामाजिक विषयों पर आधारित कला निर्माण का प्रत्यक्ष मार्गदर्शन मिल रहा है।
कार्यशाला संयोजक भोजराज धनगर ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। कला और साहित्य के इस अनूठे संगम ने रायपुर साहित्य उत्सव 2026 को बहुआयामी स्वरूप प्रदान किया है, जहां शब्दों के साथ रंग भी संवेदनाओं की अभिव्यक्ति कर रहे हैं।