चिकित्सकों की सतर्कता से बची प्रसूता की जान, रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में पेरिपार्टम कार्डियक अरेस्ट के बाद सफल इलाज
स्व. लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, रायगढ़ एवं संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय, रायगढ़ के चिकित्सकों ने एक 23 वर्षीय प्रथम गर्भवती महिला को पेरिपार्टम कार्डियक अरेस्ट जैसी गंभीर स्थिति से सफलतापूर्वक बचाकर उन्नत मातृ एवं आपातकालीन सेवाओं का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया।
UNITED NEWS OF ASIA . अमृतेश्वर सिंह ,रायपुर | छत्तीसगढ़ के रायगढ़ स्थित स्व. लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, रायगढ़ से संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय, रायगढ़ में चिकित्सकों की तत्परता, उच्चस्तरीय चिकित्सा प्रबंधन एवं समन्वित टीमवर्क से एक 23 वर्षीय प्रथम गर्भ प्रसूता की जान बचाई गई। महिला को पेरिपार्टम कार्डियक अरेस्ट जैसी अत्यंत गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ा था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मरीज को गर्भावस्था के दौरान प्री-एक्लेम्पसिया (उच्च रक्तचाप) की शिकायत थी। 02 फरवरी 2026 को दोपहर लगभग 12 बजे गंभीर अवस्था में उसे निजी अस्पताल से मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन विभाग में लाया गया। जांच के दौरान चिकित्सकों ने पल्मोनरी एडीमा (फेफड़ों में पानी भरना) की पुष्टि की, जो जानलेवा स्थिति मानी जाती है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल आपातकालीन सिजेरियन सेक्शन (LSCS) का निर्णय लिया गया। उपचार के दौरान मरीज को अचानक पेरिपार्टम कार्डियक अरेस्ट हो गया। इस नाजुक क्षण में एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद मसीह लकड़ा के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने तुरंत उच्च गुणवत्ता वाली सीपीआर प्रारंभ की और त्वरित समन्वित प्रयासों से मरीज की हृदय गति पुनः स्थापित की गई।
इसके बाद मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट पर आईसीयू में रखा गया, जहां गहन निगरानी एवं व्यवस्थित पोस्ट-कार्डियक अरेस्ट केयर प्रदान की गई। लगभग तीन दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और 12 फरवरी 2026 को उसे आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट किया गया। उपचार पूर्ण होने के पश्चात महिला को सफलतापूर्वक डिस्चार्ज कर दिया गया।
इस जीवनरक्षक प्रक्रिया में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. टी.के. साहू सहित डॉ. चंद्रभानु पैंकरा, डॉ. अशोक सिंह सिदार, डा. लेश पटेल, डॉ. अनीश, डॉ. लक्ष्मी यादव, डॉ. अमित भोई एवं डॉ. सुभाष राज के साथ ऑपरेशन थिएटर स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. एम.के. मिंज ने बताया कि यह सफलता समय पर पहचान, उच्च गुणवत्ता वाली सीपीआर, त्वरित निर्णय क्षमता और बहुविषयक टीमवर्क का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में यदि विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखरेख समय पर उपलब्ध हो, तो अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में भी मातृ जीवन की रक्षा संभव है।
यह उपलब्धि रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपलब्ध उन्नत आपातकालीन एवं मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।