पुणे में आदिवासी छात्रों की समस्याओं पर राहुल गांधी का समर्थन, बोले- मुझे बुलाओ, धरने पर बैठूंगा

महाराष्ट्र के पुणे में कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान आदिवासी छात्रों की समस्याओं का मुद्दा उठा। एक छात्रा ने हॉस्टल, शिक्षा, सुरक्षा और आश्रम स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी से जुड़ी समस्याएं राहुल गांधी के सामने रखीं। छात्रा ने बताया कि पुणे के मंजरी में आदिवासी छात्र पिछले 10 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे हैं। मामले को सुनने के बाद राहुल गांधी ने समर्थन का आश्वासन देते हुए कहा कि उन्हें बुलाया जाए, वे छात्रों के साथ बैठने आएंगे और उनके मुद्दों को सरकार तक पहुंचाएंगे।

Aug 23, 2026 - 08:56
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पुणे में आदिवासी छात्रों की समस्याओं पर राहुल गांधी का समर्थन, बोले- मुझे बुलाओ, धरने पर बैठूंगा

UNITED NEWS OF ASIA. पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान आदिवासी छात्रों की समस्याओं का मुद्दा प्रमुखता से उठा। कार्यक्रम में छात्रों से संवाद करते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आदिवासी छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उन्हें समर्थन देने का आश्वासन दिया। एक छात्रा ने आदिवासी छात्रों के हॉस्टल, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को उनके सामने रखा।

छात्रा ने बताया कि पुणे के मंजरी इलाके में आदिवासी छात्र पिछले 10 दिनों से अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शन में दो छात्राएं भी शामिल हैं। छात्रा के मुताबिक, भूख हड़ताल के दौरान एक छात्रा की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। छात्रा ने कहा कि आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों का मानना है कि यह मामला मुख्यमंत्री स्तर पर उठाया जाना चाहिए।

छात्रा ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उसने कहा कि यदि आदिवासी छात्रों के विकास और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए काम नहीं किया जा सकता, तो जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। इस दौरान आदिवासी आश्रम स्कूलों की स्थिति का मुद्दा भी सामने आया।

छात्रा ने आरोप लगाया कि कई आश्रम स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। कई जगह छात्रों के लिए पर्याप्त बेड और पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होने की बात कही गई। इसके अलावा सरकारी आदिवासी छात्रावासों में रहने के लिए निर्धारित आयु सीमा बढ़ाने की मांग भी उठाई गई। छात्रा ने इसे बढ़ाकर 35 वर्ष करने की मांग की और कहा कि आदर्श स्थिति में ऐसी आयु सीमा नहीं होनी चाहिए।

आश्रम स्कूलों में संचालित सेंट्रलाइज्ड किचन सिस्टम को लेकर भी छात्रा ने सवाल उठाए। उसका कहना था कि एक स्थान पर खाना तैयार करने के बाद उसे लंबी दूरी तक स्कूलों में पहुंचाया जाता है, जिससे व्यवस्था को लेकर कई तरह की परेशानियां सामने आती हैं।

छात्रा की पूरी बात सुनने के बाद राहुल गांधी ने आदिवासी छात्रों के आंदोलन में समर्थन देने की पेशकश की। उन्होंने कहा, “मुझे वहां बुलाओ, मैं आऊंगा और तुम्हारे साथ बैठूंगा।” राहुल गांधी ने संकेत दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो वह छात्रों के साथ धरने पर भी बैठेंगे और उनकी समस्याओं को संबंधित अधिकारियों और सरकार तक पहुंचाने के लिए आवाज उठाएंगे।

राहुल गांधी ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी छात्रों की शिक्षा, छात्रावास सुविधाओं, सुरक्षा और आश्रम स्कूलों में बुनियादी व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

अब देखना होगा कि आदिवासी छात्रों की मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं। वहीं राहुल गांधी के समर्थन के बाद छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने की संभावना भी बढ़ गई है।