PMGSY सड़कों पर भ्रष्टाचार की परतें उजागर, जांच दल के घेरे में कार्यपालन अभियंता मोतीराम सिंह

एमसीबी जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़कों में भारी भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। खराब गुणवत्ता और मानकों की अनदेखी को लेकर राजधानी रायपुर से पहुंची जांच टीम ने निरीक्षण शुरू किया है। इस मामले में कार्यपालन अभियंता मोतीराम सिंह जांच के दायरे में आ गए हैं।

Jan 21, 2026 - 13:45
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PMGSY सड़कों पर भ्रष्टाचार की परतें उजागर, जांच दल के घेरे में कार्यपालन अभियंता मोतीराम सिंह

UNITED NEWS OF  ASIA. प्रदीप पाटकर,कोरिया | मनेन्द्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर (MCB)। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत जिले में बनाई जा रही सड़कों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। वनांचल क्षेत्रों में विकास की जीवनरेखा मानी जाने वाली ये सड़कें पहली बारिश भी झेलने की स्थिति में नहीं दिख रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राजधानी रायपुर से उच्च अधिकारियों की जांच टीम जिले में पहुंची है, जिससे पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है।

सूत्रों के अनुसार जनकपुर, केल्हारी और मनेन्द्रगढ़ के दूरस्थ इलाकों में बनी सड़कों की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों के आधार पर जब जांच शुरू हुई तो विभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) मोतीराम सिंह स्वयं जांच के घेरे में आ गए हैं। बताया जा रहा है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़कों में तय तकनीकी मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। डामरीकरण में मानक स्तर की सामग्री नहीं लगाई गई, जिससे सड़कें कुछ ही महीनों में उखड़ने लगी हैं। आरोप यह भी है कि ठेकेदारों से मोटी रकम लेकर निरीक्षण के दौरान जानबूझकर आंखें मूंदी गईं।

मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:

  • डामरीकरण में गुणवत्ता विहीन सामग्री का उपयोग

  • तकनीकी मापदंडों और शासन निर्देशों का उल्लंघन

  • ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए विभागीय साठगांठ

  • निरीक्षण और माप पुस्तिका में अनियमितताएं

एमसीबी जिले में पीएमजीएसवाई विभाग पहले भी विवादों में रहा है, लेकिन इस बार उच्च स्तरीय जांच ने प्रशासन की साख को दांव पर ला दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद मामला अब राजधानी तक पहुंचा।

अब पूरे जिले की निगाहें जांच दल की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। यह देखना अहम होगा कि सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन’ नीति के तहत दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। करोड़ों की लागत से बनी ये सड़कें ग्रामीणों की जीवनरेखा हैं, और भ्रष्टाचार के कारण उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है।