ग्राम ओरमा में बघमरा माइनर नहर की स्थिति पहले काफी खराब थी। नहर में गाद, कचरा और झाड़ियां जमा हो जाने के कारण पानी का प्रवाह बाधित हो जाता था। इसका असर यह था कि नहर का पानी खेतों और तालाबों तक नहीं पहुंच पाता था और बीच रास्ते में ही रुक जाता था। इससे जल का दुरुपयोग भी होता था और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था।
इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए सरपंच मंजूलता साहू ने पंचायत स्तर पर ठोस कदम उठाए। जेसीबी मशीन की मदद से बघमरा माइनर नहर की व्यापक सफाई कराई गई। नहर के साथ-साथ उससे जुड़ी नालियों की भी सफाई की गई, जिससे पानी के प्रवाह में आ रही रुकावट पूरी तरह समाप्त हो गई।
नहर और नालियों की सफाई के बाद अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। पानी बिना किसी अवरोध के सीधे तालाब तक पहुंच रहा है। इससे गांव में जल संचय की स्थिति मजबूत हुई है और तालाबों में पानी की उपलब्धता बढ़ी है। यह न केवल सिंचाई के लिए उपयोगी साबित हो रहा है, बल्कि भूजल स्तर को सुधारने में भी मददगार है।
इस सुधार का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिल रहा है। अब उन्हें सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी आसानी से उपलब्ध हो रहा है, जिससे फसलों की पैदावार बेहतर होने की उम्मीद है। साथ ही, जल संरक्षण के इस प्रयास से भविष्य में पानी की कमी की समस्या को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
ग्राम पंचायत द्वारा मेडकी निस्तार तालाब में भी पानी पहुंचाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। सरपंच मंजूलता साहू के निर्देश पर यहां भी जेसीबी मशीन से नालियों की सफाई की जा रही है, ताकि नहर का पानी इस तालाब तक भी पहुंच सके। यह कार्य अभी प्रगति पर है और जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद है।
पंचायत का मुख्य उद्देश्य गांव में जल का सही उपयोग सुनिश्चित करना और पानी के दुरुपयोग को रोकना है। पहले जहां पानी रास्ते में ही व्यर्थ हो जाता था, अब उसे संरक्षित कर तालाबों में संग्रहित किया जा रहा है। इससे गांव के जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव हो पाया है।
ग्राम ओरमा में जल प्रबंधन की दिशा में उठाया गया यह कदम एक मिसाल बनता जा रहा है। यह न केवल किसानों के लिए लाभकारी है, बल्कि पूरे गांव के सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी है। सरपंच और पंचायत के इस प्रयास से यह स्पष्ट होता है कि यदि सही योजना और नेतृत्व हो, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े बदलाव संभव हैं