नर्सरी स्कूल मान्यता और RTE को लेकर वर्षों पुरानी लड़ाई में सत्य की जीत, हाईकोर्ट के फैसले से गरीब बच्चों को मिलेगा अधिकार

छत्तीसगढ़ में नर्सरी स्कूलों की मान्यता और आरटीई के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश को लेकर वर्षों से चल रही कानूनी लड़ाई में अब न्यायिक समर्थन मिला है। राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले ने इस संघर्ष को सही ठहराया है, जिससे प्रदेश के लाखों वंचित बच्चों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

Jan 20, 2026 - 13:05
Jan 20, 2026 - 13:06
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नर्सरी स्कूल मान्यता और RTE को लेकर वर्षों पुरानी लड़ाई में सत्य की जीत, हाईकोर्ट के फैसले से गरीब बच्चों को मिलेगा अधिकार

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | छत्तीसगढ़ में नर्सरी शिक्षा और आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) को लेकर वर्षों से चल रही एक लंबी और कठिन लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। वर्ष 2013 में तत्कालीन रमन सरकार द्वारा राज्य में नर्सरी स्कूलों को मान्यता दी गई थी, जिससे गरीब, वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश का अवसर मिला। यह निर्णय लाखों परिवारों के लिए शिक्षा की नई उम्मीद लेकर आया था।

हालांकि, सत्र 2016-17 से यह व्यवस्था अचानक बंद कर दी गई। आरोप है कि निजी स्कूल माफिया और शिक्षा विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के चलते नर्सरी स्तर पर आरटीई प्रवेश को समाप्त कर दिया गया, जिससे सबसे अधिक नुकसान गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को हुआ। इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षा अधिकार समर्थकों को दबाने का भी प्रयास किया गया।

इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने वाले एक शिक्षा कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि उनके आंदोलन के दौरान प्रभावशाली निजी स्कूल संचालकों और शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों ने मिलकर उन्हें और दो अन्य साथियों को जेल भिजवाया। बावजूद इसके, उन्होंने अपनी लड़ाई को जारी रखा और न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया।

अब राजस्थान हाईकोर्ट का ताजा फैसला इस संघर्ष को पूरी तरह जायज ठहराता है। अदालत के निर्णय से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि नर्सरी स्तर पर शिक्षा का अधिकार गरीब और वंचित बच्चों का संवैधानिक हक है। इस फैसले का सीधा लाभ रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लाखों बच्चों को मिलने की संभावना है।

इस संघर्ष को “सत्य की लड़ाई” बताते हुए आंदोलनकारी ने कहा कि सच्चाई की लड़ाई अक्सर अकेले लड़ी जाती है, चाहे सामने कितनी भी ताकत, पैसा या रसूख क्यों न हो। उनका कहना है कि वे न डरेंगे, न झुकेंगे और जरूरत पड़ी तो हर कुर्बानी देने को तैयार हैं, क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों गरीब छत्तीसगढ़िया बच्चों के भविष्य की है।

हाईकोर्ट के इस फैसले को शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का आधार बन सकता है।

जय छत्तीसगढ़ महतारी।