नुक्कड़ नाटक में शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने का संदेश दिया गया। बालिकाओं ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से प्लास्टिक मुक्त समाज के निर्माण में आम नागरिकों की भूमिका को रेखांकित किया। संवाद, अभिनय और प्रस्तुति के जरिए लोगों को स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम श्री जयराम साहू और श्री भुनेश्वर चंद्राकर के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी पंडरिया दीपक ठाकुर, अश्विनी चंद्राकर, राजीव श्रीवास्तव, सोनी सहित वरिष्ठ गणमान्यजन, ग्रामीण और पालकगण उपस्थित रहे।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी दीपक ठाकुर ने बालिकाओं की नुक्कड़ नाटक प्रस्तुति की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने लोगों से अपने घर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ रखने और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की अपील की।
कार्यक्रम में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की अधीक्षिका कामिनी जोशी, शिक्षिकाएं नंदनी, किरण और सरस्वती भी उपस्थित रहीं। इसके अलावा सरस्वती शिशु मंदिर के प्राचार्य गिरीश साहू, अनिल मानिकपुरी सहित विद्यालय परिवार के सदस्य, पालकगण, ग्रामीणजन और जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल हुए।
बालिकाओं ने नाटक के माध्यम से लोगों को सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करने के साथ ही स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। प्रस्तुति में प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग को कम करने और प्लास्टिक मुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम का संचालन मोहन शर्मा ने किया। नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति के बाद विद्यालय परिवार की ओर से प्रतिभागी बालिकाओं को विकासखंड शिक्षा अधिकारी दीपक ठाकुर के हाथों पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। बालिकाओं को उनकी प्रस्तुति और सहभागिता के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार की ओर से उपस्थित अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, पालकगण और ग्रामीणजनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। नवधा मंच पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े संदेशों को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बालिकाओं ने यह संदेश दिया कि स्वच्छता केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी से ही स्वच्छ और बेहतर वातावरण बनाया जा सकता है। इसी तरह प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी सामूहिक जागरूकता और जिम्मेदारी आवश्यक है। कार्यक्रम ने बालिकाओं की रचनात्मक प्रतिभा के साथ उनकी सामाजिक सहभागिता को भी सामने रखा।