“पौधारोपण वाली जमीन बनी खुदाई का मैदान, मढ़ी में मुरूम खनन पर ग्रामीणों के सवाल।”

तिल्दा के ग्राम पंचायत मढ़ी में तालाब निर्माण के नाम पर करीब 4 एकड़ शासकीय भूमि में बड़े पैमाने पर मुरूम खुदाई को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खुदाई से निकलने वाले मुरूम को बाहर ले जाकर बेचे जाने की आशंका है। जिस जमीन पर पूर्व में आंवला पौधारोपण किया गया था, वहां खुदाई से पर्यावरण और शासकीय संपत्ति की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हुए हैं। ग्रामीणों ने राजस्व और खनिज विभाग से स्थल निरीक्षण कर स्वीकृति, तकनीकी अनुमति, सड़क से दूरी, मुरूम परिवहन और रॉयल्टी भुगतान की जांच की मांग की है।

Aug 19, 2026 - 11:27
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“पौधारोपण वाली जमीन बनी खुदाई का मैदान, मढ़ी में मुरूम खनन पर ग्रामीणों के सवाल।”

UNITED NEWS OF ASIA. अशोक मिश्रा, तिल्दा नेवरा l ग्राम पंचायत मढ़ी में तालाब निर्माण के नाम पर शासकीय भूमि में बड़े पैमाने पर मुरूम की खुदाई को लेकर ग्रामीणों ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्राम पंचायत मढ़ी से करीब 4 किलोमीटर दूर मढ़ी और नकटी के बीच लगभग 4 एकड़ शासकीय भूमि पर इन दिनों खुदाई का कार्य चल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि तालाब निर्माण की आड़ में जमीन से निकलने वाले मुरूम को बाहर ले जाकर उपयोग या बिक्री किए जाने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मुरूम का उत्खनन और परिवहन बिना आवश्यक अनुमति के किया जा रहा है, तो इससे शासन को राजस्व नुकसान हो सकता है।

बताया जा रहा है कि जिस शासकीय जमीन पर वर्तमान में खुदाई की जा रही है, वहां कुछ वर्ष पहले आंवला के पौधों का वृक्षारोपण भी किया गया था। अब उसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खुदाई होने से पर्यावरण संरक्षण और शासकीय भूमि के उचित उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वृक्षारोपण के लिए उपयोग की गई भूमि को तालाब निर्माण के लिए चिन्हांकित करने से पहले संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं का परीक्षण किया जाना चाहिए था।

मामले में पक्की और आवागमन वाली सड़क से खुदाई स्थल की दूरी को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई है। स्थानीय लोगों के अनुसार जिस स्थान पर मुरूम निकाला जा रहा है, वह सड़क के काफी नजदीक है। ग्रामीणों का कहना है कि खनन कार्य के दौरान सड़क से निर्धारित दूरी और सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन किया जाना जरूरी है। यदि वास्तव में निर्धारित दूरी का पालन नहीं किया गया है तो इससे सड़क से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। ऐसे में खनिज विभाग द्वारा मौके पर भौतिक निरीक्षण कर खुदाई स्थल की सड़क से वास्तविक दूरी और लागू नियमों के पालन की स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है।

ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल तालाब निर्माण के लिए स्थान चयन को लेकर भी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तालाब निर्माण का उद्देश्य गांव की पानी संबंधी समस्या का समाधान करना है तो गांव से करीब 4 किलोमीटर दूर स्थान का चयन क्यों किया गया। क्या स्थान का तकनीकी सर्वे कराया गया था और क्या तालाब निर्माण के लिए विधिवत प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति ली गई है, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

इस संबंध में ग्राम पंचायत के सरपंच का कहना है कि गांव में पानी की समस्या को देखते हुए तालाब निर्माण के लिए खुदाई कराई जा रही है। हालांकि ग्रामीणों का सवाल है कि खुदाई से निकलने वाले मुरूम का उपयोग कहां किया जा रहा है, कितनी मात्रा में मुरूम निकाला जा चुका है और उसे बाहर ले जाने के लिए कौन सी अनुमति प्राप्त की गई है।

शासकीय जमीन से मुरूम उत्खनन के मामले में ग्रामीणों ने खनिज और राजस्व विभाग से जांच की मांग की है। ग्रामीण यह भी जानना चाहते हैं कि खुदाई से निकले मुरूम की वास्तविक मात्रा कितनी है, उसका परिवहन कहां किया जा रहा है, क्या परिवहन की अनुमति ली गई है और क्या नियमानुसार शासन को रॉयल्टी का भुगतान किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिना अनुमति मुरूम का उत्खनन अथवा परिवहन पाया जाता है तो शासन को आर्थिक नुकसान होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

पौधारोपण वाली शासकीय जमीन पर खुदाई किए जाने से पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि पर पौधे लगाए गए थे, वहां बड़े पैमाने पर खुदाई से पहले पौधारोपण और भूमि उपयोग से संबंधित स्थिति की जांच की जानी चाहिए थी। उनका कहना है कि शासकीय भूमि का उपयोग पारदर्शी प्रक्रिया और निर्धारित नियमों के तहत किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों ने मांग की है कि राजस्व विभाग और खनिज विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच करे। जांच में भूमि का सीमांकन, तालाब निर्माण की स्वीकृति, तकनीकी अनुमति, खुदाई की मात्रा, सड़क से वास्तविक दूरी, मुरूम के परिवहन, उपयोग और रॉयल्टी भुगतान सहित सभी पहलुओं को शामिल किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तालाब निर्माण का कार्य नियमों के अनुरूप है तो पंचायत द्वारा संबंधित स्वीकृतियों और दस्तावेजों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

वहीं यदि जांच में तालाब निर्माण की आड़ में नियम विरुद्ध मुरूम उत्खनन, परिवहन अथवा बिक्री की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल मढ़ी में शासकीय जमीन पर चल रही खुदाई को लेकर ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खुदाई वास्तव में तालाब निर्माण की प्रक्रिया का हिस्सा है या इसके माध्यम से मुरूम के उत्खनन और परिवहन से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।