कार्यक्रम की शुरुआत पेंड्रावन स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर, पेंड्रावन में पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद सैकड़ों युवाओं की बाइक रैली, दर्जनों वाहनों के काफिले और जगह-जगह बनाए गए स्वागत द्वारों के बीच यात्रा खरोरा होते हुए गृह ग्राम मुरा पहुँची। रास्ते भर पुष्पवर्षा और आतिशबाजी ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।
खरोरा के अटल चौक, खरोरा और दीनदयाल उपाध्याय चौक, खरोरा में माल्यार्पण के दौरान भारी भीड़ उमड़ी, जिससे कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। नागरिकों और कार्यकर्ताओं में मिश्रा से मिलने की होड़ दिखाई दी।
इस दौरान मिश्रा ने स्थानीय गुरुद्वारे में मत्था टेककर सिख समाज से अपने पारिवारिक संबंधों को याद किया और महामाया मंदिर, खरोरा में दर्शन-पूजन के बाद मोहरेंगा पहुँचे, जहाँ बड़ी संख्या में नागरिकों ने उनका स्वागत किया।
गृह ग्राम मुरा में प्रवेश करते ही उत्साह चरम पर पहुँच गया। ग्रामीणों ने पालक-पावड़े बिछाकर अपने अतिथि का स्वागत किया। सैकड़ों महिलाओं द्वारा माल्यार्पण और पुष्पवर्षा की गई। सड़कें फूलों से पट गईं और लगभग एक घंटे तक आतिशबाजी चलती रही।
अपने पिता एवं स्वतंत्रता सेनानी पंडित लखनलाल मिश्रा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते समय मिश्रा भावुक हो उठे। ग्रामीणों ने उन्हें उनके वजन के बराबर लड्डुओं से तौलकर सम्मानित किया, जो कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. लखनलाल धीवर ने कहा कि मिश्रा जैसे जमीनी और संवेदनशील अधिकारी प्रदेश के लिए सौभाग्य होते हैं। जिला पंचायत सदस्य सोना वर्मा ने उन्हें क्षेत्र का गौरव बताते हुए कहा कि अब उनकी प्रतिभा का लाभ पूरे छत्तीसगढ़ को नीति निर्माण में मिलेगा।
अपने संबोधन में मिश्रा ने कहा कि वे आज अपने परिवार के बीच आए हैं और सभी का आशीर्वाद चाहते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह नया दायित्व उन्हें प्रदेश सेवा का बड़ा अवसर प्रदान करता है।
कार्यक्रम में आसपास के 20 से 25 गांवों से हजारों की संख्या में नागरिक पहुँचे। इस अवसर पर रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, नगर पंचायत खरोरा अध्यक्ष अनिल कुमार सोनी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण उपस्थित रहे।
समूचे आयोजन ने यह संदेश दिया कि मुरा और आसपास का क्षेत्र अपने प्रतिनिधि की उपलब्धि को केवल औपचारिक सम्मान नहीं, बल्कि जनभागीदारी के उत्सव के रूप में मना रहा है।