शिक्षा मंत्री के दौरे के बीच मोहला जिले के 599 स्कूलों की बिजली गुल, 41 लाख रुपये का विद्युत बिल बकाया

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में शिक्षा विभाग का करीब 41 लाख रुपये का विद्युत बिल बकाया होने के चलते 599 स्कूलों की बिजली आपूर्ति बंद होने का मामला सामने आया है। स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली काटे जाने से पेयजल, शौचालय, मध्यान भोजन और डिजिटल शिक्षा जैसी व्यवस्थाएं प्रभावित होने की बात सामने आई है।

Sep 9, 2026 - 13:53
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शिक्षा मंत्री के दौरे के बीच मोहला जिले के 599 स्कूलों की बिजली गुल, 41 लाख रुपये का विद्युत बिल बकाया

UNITED NEWS OF ASIA. जावेद शेख, मानपुर l छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। शिक्षा विभाग का करीब 41 लाख रुपये का विद्युत बिल बकाया होने के कारण जिले के विभिन्न शासकीय विद्यालयों की बिजली आपूर्ति बंद होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि प्राथमिक शाला, माध्यमिक शाला, हाई स्कूल, हायर सेकेंडरी स्कूल के साथ पीएम श्री और स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों समेत करीब 599 स्कूल इस स्थिति से प्रभावित हुए हैं। यह मामला उस समय सामने आया जब छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव जिले के दो दिवसीय प्रवास पर थे और विभागीय समीक्षा बैठकों तथा विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था की स्थिति का जायजा ले रहे थे।

बिजली आपूर्ति बंद होने का सीधा असर स्कूलों की रोजमर्रा की व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। विद्यालयों में पेयजल की व्यवस्था प्रभावित होने के साथ ही शौचालयों में पानी की उपलब्धता भी बाधित हुई है। कई स्कूलों में हैंडपंप या पानी की मोटर बिजली पर निर्भर होने के कारण विद्यार्थियों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी और उमस के बीच बिजली नहीं होने से कक्षाओं में पढ़ाई प्रभावित होने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा डिजिटल शिक्षा से जुड़ी गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं, क्योंकि कंप्यूटर, प्रोजेक्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का संचालन बिजली के बिना संभव नहीं है।

स्कूलों में बिजली कटौती का असर विद्यार्थियों की मूलभूत सुविधाओं पर भी पड़ रहा है। कुछ विद्यालयों में शौचालयों में पानी की कमी और साफ-सफाई प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कुछ शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को अपने घर से पानी की बोतल लाने की सलाह दिए जाने की बात भी सामने आई है। विद्यालयों में बागवानी और छोटी खेती जैसी गतिविधियां भी बिजली और पानी की उपलब्धता प्रभावित होने से प्रभावित हो रही हैं। पौधों और हरी सब्जियों की देखभाल में भी परेशानी होने की जानकारी दी गई है।

बिजली आपूर्ति बंद होने का प्रभाव मध्यान भोजन व्यवस्था पर भी पड़ा है। स्कूल परिसर में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण मध्यान भोजन तैयार करने वाले समूहों और कर्मचारियों को कठिनाई हो रही है। कुछ स्थानों पर भोजन बनाने से इनकार किए जाने की बात सामने आई है। ऐसी स्थिति में कहीं घर से मध्यान भोजन तैयार कर लाने तो कहीं सूखा भोजन वितरित करने की व्यवस्था किए जाने की जानकारी है। भोजन तैयार करने, सामग्री धोने और बच्चों द्वारा उपयोग किए गए बर्तनों की सफाई के लिए पानी जरूरी होता है, इसलिए बिजली बंद होने से यह पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

इस मामले में स्मार्ट मीटर की तकनीक भी चर्चा में है। स्थानीय स्तर पर विद्युत विभाग के कर्मचारियों से मिली जानकारी के अनुसार, बिजली काटने के लिए कर्मचारियों को खंभे पर चढ़कर तार काटने की आवश्यकता नहीं पड़ी। स्मार्ट मीटर में लगे रिले के माध्यम से विद्युत आपूर्ति को तकनीकी तरीके से बंद किया जा सकता है। बताया गया कि एक रिले राज्य स्तर पर कंप्यूटर आधारित प्रणाली से संचालित होती है, जबकि दूसरी व्यवस्था स्थानीय स्तर पर विद्युत विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए उपलब्ध रहती है। इस तकनीक के माध्यम से दूरस्थ स्तर से भी विद्युत प्रवाह को नियंत्रित किया जा सकता है।

599 स्कूलों की बिजली आपूर्ति प्रभावित होने और 41 लाख रुपये के बकाया विद्युत बिल की स्थिति ने शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। खासकर स्कूलों में पेयजल, शौचालय, मध्यान भोजन और डिजिटल शिक्षा जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं बिजली से जुड़ी होने के कारण इस समस्या का जल्द समाधान जरूरी माना जा रहा है। शिक्षा मंत्री के जिले में प्रवास के दौरान सामने आए इस मामले के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बकाया बिल के भुगतान और स्कूलों की बिजली व्यवस्था बहाल करने के लिए विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।