छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़ना अक्षम्य अपराध, दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई – मनोज सिंह ठाकुर
रायपुर के वीआईपी रोड चौक पर छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़े जाने की घटना पर अधिवक्ता और पूर्व श्रम कल्याण मंडल सदस्य मनोज सिंह ठाकुर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ की संस्कृति और अस्मिता पर हमला बताया तथा दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। छत्तीसगढ़ की अस्मिता और गौरव के प्रतीक छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को रायपुर के वीआईपी रोड चौक पर तोड़े जाने की घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। इस घटना को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों ने नाराजगी जताई है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के पूर्व सदस्य एवं अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने मूर्ति तोड़फोड़ की इस घटना को “अक्षम्य अपराध” करार दिया है।
श्री ठाकुर ने कहा कि “छत्तीसगढ़ महतारी” राज्य की आत्मा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। ऐसे पवित्र प्रतीक को तोड़ना केवल एक मूर्ति पर हमला नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की अस्मिता पर सीधा प्रहार है। उन्होंने कहा, “यह घटना हमारे सांस्कृतिक धरोहर का उल्लंघन है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस कृत्य में शामिल लोगों को तत्काल गिरफ्तार कर कठोर दंड दिया जाना चाहिए।”
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि वीआईपी चौक पर नई एवं भव्य छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा शीघ्र स्थापित की जाए ताकि प्रदेशवासियों की भावनाओं का सम्मान हो सके। उन्होंने कहा कि यह केवल मूर्ति पुनःस्थापना नहीं होगी, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता की पुनःस्थापना होगी।
श्री ठाकुर ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने कहा, “हमारा समाज ऐसे निंदनीय कृत्यों के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होगा और अपने सांस्कृतिक प्रतीकों की रक्षा करेगा।”
उन्होंने प्रदेश की जनता से भी अपील की कि वे इस घटना पर गंभीरता से विचार करें और छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपरा को बनाए रखने में अपना योगदान दें।
यह घटना केवल एक विध्वंस की घटना नहीं, बल्कि राज्य की अस्मिता पर हमला है, जिसे समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर सख्ती से जवाब देना होगा।
मनोज सिंह ठाकुर ने अंत में कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी के सम्मान में हम सबको एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए — क्योंकि यही हमारी संस्कृति, पहचान और गर्व की सच्ची रक्षा है।