नया रायपुर स्थित मंत्री के निवास पर आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में विभिन्न स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को ‘मिलेट्स कार्ट’ और सहायता राशि के चेक वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें मुख्यधारा के विकास से जोड़ना है।
मंत्री राजवाड़े ने अपने संबोधन में बताया कि यह योजना महिलाओं के लिए स्वरोजगार का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कांकेर जिले के नरहरपुर गांव की महिलाएं इस योजना के माध्यम से प्रतिदिन 2 से 3 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं, जो मासिक रूप से 25 से 30 हजार रुपये तक पहुंच जाती है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाना है, ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भर जीवन जी सकें। यह पहल न केवल महिलाओं की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान को भी बढ़ा रही है।
मंत्री ने यह भी बताया कि महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं में आत्मविश्वास, क्षमता और समान अवसर विकसित करने की एक सतत प्रक्रिया है। जब महिलाएं शिक्षित और सक्षम बनती हैं, तो पूरे समाज का विकास होता है और राज्य की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है।
इस दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की महिला कोष योजना और सक्षम योजना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महिला कोष योजना के तहत स्व-सहायता समूहों को मात्र 3 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। पहली बार 2 लाख रुपये तक और समय पर भुगतान करने पर दूसरी बार 6 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में 10,500 महिलाओं को 10.70 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया, जबकि 2023-24 में 2500 समूहों को 31 करोड़ रुपये ऋण देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा सक्षम योजना के तहत भी महिलाओं को व्यक्तिगत स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर बस्तर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा इस योजना का शुभारंभ किया गया था।
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल सहित कई अधिकारी और हितग्राही उपस्थित रहे।
यह पहल छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो आने वाले समय में हजारों महिलाओं के जीवन को बदलने की क्षमता रखती है।