नूतन सिंह ठाकुर ने कहा कि कोरबा शहर के आसपास पहले से ही कई कोयला आधारित विद्युत संयंत्र स्थापित हैं, जिनके कारण क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन गंभीर रूप से प्रभावित हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में लैंको परियोजना द्वारा क्षेत्र के विकास, वृक्षारोपण, राख प्रबंधन और प्रभावित ग्रामों के बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर जो वादे किए गए थे, वे आज तक पूरे नहीं किए गए। ऐसे में उसी क्षेत्र में पुनः इतने बड़े विद्युत संयंत्रों की स्थापना न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने कहा कि कोरबा शहर चारों ओर से पहले से स्थापित औद्योगिक इकाइयों से घिरा हुआ है। इनमें प्रमुख रूप से एनटीपीसी, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल, बालको सहित कई बड़े पावर प्रोजेक्ट संचालित हैं। इन परियोजनाओं से निकलने वाले वायु एवं ध्वनि प्रदूषण से कोरबा की आम जनता पहले से ही परेशान है।
नगर निगम अध्यक्ष ने कहा कि कोरबा शहर लगभग एक गैस चेंबर की तरह बनता जा रहा है, जहां 10 किलोमीटर के दायरे में लगभग 4500 मेगावाट से अधिक की विद्युत उत्पादन क्षमता वाले संयंत्र और विशाल कोयला खदानें संचालित हैं। इसके दुष्परिणाम अब आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। लोगों में श्वसन संबंधी बीमारियां, त्वचा रोग और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। साथ ही क्षेत्र से कई जीव-जंतु और पक्षी प्रजातियां भी विलुप्त होती जा रही हैं।
नूतन सिंह ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि कोरबा पावर लिमिटेड द्वारा प्रस्तुत पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में कोरबा के संरक्षित वन क्षेत्र, पर्वतीय क्षेत्र, वास्तविक जनसंख्या, नगर निगम सीमा, जल संतुलन, वन्य जीव और पक्षियों की स्थिति तथा पूर्व से मौजूद प्रदूषण स्तर से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों को गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण मंडल और जिला प्रशासन से मांग की है कि 27 फरवरी को प्रस्तावित जनसुनवाई को तत्काल निरस्त किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं वैधानिक जांच कराई जाए। नूतन सिंह ठाकुर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोरबा की आम जनता नए विद्युत संयंत्रों की स्थापना के बिल्कुल पक्ष में नहीं है।
नगर निगम अध्यक्ष ने कहा कि यदि प्रशासन और संबंधित पर्यावरण एजेंसियां कोरबा के पर्यावरण और नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले घातक प्रभावों को नजरअंदाज करते हुए नए पावर प्लांट की अनुमति देती हैं, तो आम जनता के हित में न्यायालय की शरण ली जाएगी। उन्होंने दोहराया कि कोरबा के पर्यावरण और यहां के निवासियों के जीवन की रक्षा के लिए नए विद्युत संयंत्रों की स्थापना पर रोक लगाना अत्यंत आवश्यक है।