विधायक लता उसेण्डी ने ‘मोर सुआद – दीदी की रसोई’ का किया शुभारंभ, स्वसहायता समूहों को मिला आत्मनिर्भरता का नया मंच

कोण्डागांव में विधायक लता उसेण्डी ने ‘मोर सुआद – दीदी की रसोई’ का शुभारंभ किया। यह पहल स्वसहायता समूहों की महिलाओं को आजीविका, आत्मनिर्भरता और पारंपरिक स्वाद व संस्कृति को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम बनेगी।

Jan 2, 2026 - 17:21
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विधायक लता उसेण्डी ने ‘मोर सुआद – दीदी की रसोई’ का किया शुभारंभ, स्वसहायता समूहों को मिला आत्मनिर्भरता का नया मंच

 UNITED NEWS OF ASIA. राज पांडे, कोण्डागांव। बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं कोण्डागांव की विधायक  लता उसेण्डी ने गुरुवार शाम जिले में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘मोर सुआद – दीदी की रसोई’ का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम दीदी की रसोई योजना के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य स्वसहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और स्थानीय संस्कृति व पारंपरिक स्वाद को बढ़ावा देना है। शुभारंभ अवसर पर कलेक्टर  नुपूर राशि पन्ना सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और स्वसहायता समूहों की महिलाएं उपस्थित रहीं।

इस अवसर पर विधायक  लता उसेण्डी ने कहा कि घर और परिवार की जिम्मेदारियों के साथ बाहर निकलकर काम करना महिलाओं के लिए एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन जिले की बहनें इस चुनौती को अवसर में बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लखपति दीदी योजना तथा मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाएं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विधायक ने ‘मोर सुआद’ की सराहना करते हुए कहा कि यहां लोगों को बस्तर की पारंपरिक संस्कृति के साथ घर जैसा स्वाद मिलेगा।

कलेक्टर  नुपूर राशि पन्ना ने इस नवाचार की प्रशंसा करते हुए कहा कि भविष्य में ‘मोर सुआद – दीदी की रसोई’ में सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, जिससे यहां आने वाले नागरिकों को बेहतर वातावरण और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें। उन्होंने इसे महिला समूहों के लिए एक स्थायी आजीविका मॉडल बताया।

‘मोर सुआद – दीदी की रसोई’ का संचालन लक्ष्मी स्वसहायता समूह, पलारी द्वारा किया जा रहा है। समूह ने स्वयं के संगठन से 5 लाख रुपये का ऋण तथा बैंक से 1.50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त कर यह आजीविका गतिविधि शुरू की है। इस केंद्र में न केवल घर के स्वाद वाला भोजन उपलब्ध कराया जाएगा, बल्कि ताज़ी सब्जियों की बिक्री के साथ-साथ बस्तर की समृद्ध संस्कृति पर आधारित पारंपरिक शिल्प और हस्तकला उत्पाद भी उपलब्ध होंगे।

इसी परिसर में सरस्वती स्वसहायता समूह, संबलपुर द्वारा ‘आजीविका फ्रेश’ नाम से फलों और सब्जियों की दुकान भी स्थापित की गई है। इस प्रकार ‘मोर सुआद’ केंद्र स्वसहायता समूहों की महिलाओं के लिए आय का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। समूह की सचिव  मीनाक्षी देवांगन ने बताया कि जिला प्रशासन के सहयोग से समूह की सभी महिलाएं पूरी लगन और मेहनत से कार्य करेंगी और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी।

एनआरएलएम के जिला मिशन प्रबंधक विनय सिंह ने जानकारी दी कि ‘दीदी की रसोई’ को एक ब्रांड के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्तमान में कोण्डागांव मुख्यालय में 5 स्वसहायता समूहों को इस पहल से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि भविष्य में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अन्य उपयुक्त स्थानों पर भी ऐसे केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

कार्यक्रम में पार्षद  सोनामणि, दीपेश अरोरा, गोपाल दीक्षित, जिला पंचायत सीईओ अविनाश भोई, जिला मिशन प्रबंधक विनय सिंह, जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुंजलाल सिन्हा सहित एनआरएलएम की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कुल मिलाकर ‘मोर सुआद – दीदी की रसोई’ महिला सशक्तिकरण, स्थानीय संस्कृति और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रहा है।