केदार कश्यप ने भूपेश बघेल के बयान की निंदा की, लोकतांत्रिक मर्यादाओं का हवाला दिया
वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सोशल मीडिया पर दिए गए बयान की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सोशल मीडिया पर दिए गए हालिया बयान की आलोचना करते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लेकर इस प्रकार की भाषा लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं और कानून व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को लेकर सार्वजनिक रूप से इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं मानी जा सकती।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में केदार कश्यप ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा पुलिस अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को लेकर की गई टिप्पणी लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उनका कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्थाओं पर इस प्रकार का सार्वजनिक दबाव बनाने का प्रयास लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
केदार कश्यप ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सत्ता से बाहर होने के बाद लगातार संवैधानिक संस्थाओं और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाकर राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में कानून का शासन स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है और पुलिस प्रशासन निष्पक्ष रूप से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, लेकिन विपक्ष की जिम्मेदारी लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की भी होती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति व्यक्त करना सभी का अधिकार है, किंतु धमकी या दबाव की भाषा का प्रयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था के हित में नहीं है।
केदार कश्यप ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार कानून के शासन और पारदर्शी प्रशासन के प्रति प्रतिबद्ध है। उनका दावा है कि राज्य में किसी भी व्यक्ति या संगठन को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा और कानून के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ करता रहेगा तथा सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर स्तर पर सहयोग प्रदान करेगी।
मंत्री ने कांग्रेस के शासनकाल का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस समय कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठे थे। उन्होंने कहा कि जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से अपना जनादेश दिया है और वर्तमान सरकार सुशासन तथा पारदर्शिता के आधार पर कार्य कर रही है।
केदार कश्यप ने अपने बयान में कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं, पुलिस प्रशासन और संवैधानिक व्यवस्था के प्रति सम्मान बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री से सार्वजनिक जीवन की गरिमा बनाए रखने और राजनीतिक संवाद में संयमित भाषा का उपयोग करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कानून के शासन, शांति और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ की जनता लोकतांत्रिक परंपराओं, सुशासन और शांतिपूर्ण राजनीतिक वातावरण का समर्थन करती रहेगी।