कार्यक्रम का आयोजन हनुमान वाटिका, कवर्धा के सुंदर और शांत वातावरण में किया गया, जहां विद्यार्थियों ने अपने अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। गुरुकुल पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने ‘एक सोच’ शीर्षक से नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया, जिसका मुख्य विषय सोशल मीडिया का सही और संतुलित उपयोग था।
नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि सोशल मीडिया एक दुधारी तलवार की तरह है। यदि इसका उपयोग सोच-समझकर किया जाए तो यह ज्ञान और विकास का माध्यम बन सकता है, लेकिन गलत उपयोग व्यक्ति को मानसिक तनाव, अवसाद और सामाजिक अलगाव की ओर भी ले जा सकता है। खासतौर पर ऑनलाइन गेमिंग और रील्स की बढ़ती लत को नाटक में प्रभावशाली तरीके से दर्शाया गया, जिसने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
इस प्रस्तुति में विद्यार्थियों का अभिनय बेहद सजीव और भावनात्मक था। कक्षा पांचवीं के छात्र कुनाल और गिरीश ने मदारी और जम्बूरे की भूमिका में दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। उनके संवाद और अभिनय ने नाटक को और भी रोचक बना दिया।
इस पूरे नाटक को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षकों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। डॉ. विजय कुमार शाही और अतुल वर्मा के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने अपने अभिनय को निखारा। वहीं, नेहा वर्मा, भारती राव, राधारानी और केजेलाल साहू ने भी विद्यार्थियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रतियोगिता में गुरुकुल पब्लिक स्कूल के अलावा अभ्युदय स्कूल, होली किंगडम स्कूल और अशोका पब्लिक स्कूल ने भी भाग लिया। सभी विद्यालयों ने अपने-अपने स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, लेकिन गुरुकुल की प्रस्तुति ने निर्णायकों और दर्शकों पर विशेष प्रभाव छोड़ा, जिसके चलते उसे प्रथम स्थान से सम्मानित किया गया। अभ्युदय स्कूल ने द्वितीय और होली किंगडम स्कूल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, अन्य पदाधिकारीगण और प्राचार्य ने सभी विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां न केवल उनकी प्रतिभा को निखारती हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक बनाती हैं।
गुरुकुल पब्लिक स्कूल की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव भी लाया जा सकता है। विद्यार्थियों ने अपने नाटक के जरिए यह स्पष्ट कर दिया कि यदि सोशल मीडिया का उपयोग सही दिशा में किया जाए, तो यह विकास का एक शक्तिशाली माध्यम बन सकता है।