भारत-रूस के बीच ‘RELOS’ समझौता लागू: 3000 सैनिक, 5 युद्धपोत और 10 विमान की तैनाती से बढ़ेगा सैन्य सहयोग

भारत और रूस के बीच ‘RELOS’ समझौता लागू होने के बाद दोनों देशों के सैन्य सहयोग को नई मजबूती मिलने जा रही है। इस समझौते के तहत संयुक्त सैन्य अभ्यास और रणनीतिक तैनाती में 3000 सैनिक, 5 युद्धपोत और 10 विमानों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

Apr 19, 2026 - 15:16
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भारत-रूस के बीच ‘RELOS’ समझौता लागू: 3000 सैनिक, 5 युद्धपोत और 10 विमान की तैनाती से बढ़ेगा सैन्य सहयोग

UNITED NEWS OF ASIA.  नई दिल्ली — भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों के बीच ‘RELOS’ (Reciprocal Exchange of Logistics Support) समझौता अब लागू हो गया है, जिससे सैन्य साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद है। इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों और संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे, जिससे संयुक्त सैन्य अभियानों और अभ्यासों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

‘RELOS’ समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत और रूस के बीच लॉजिस्टिक सहयोग को आसान बनाना है। इसके तहत दोनों देशों की सेनाएं जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे के बेस, ईंधन, मरम्मत और अन्य सैन्य सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगी। इससे लंबी दूरी के ऑपरेशन और समुद्री सुरक्षा अभियानों में काफी मदद मिलेगी।

इस समझौते के लागू होने के साथ ही बड़े स्तर पर संयुक्त सैन्य तैनाती और अभ्यास की योजना बनाई गई है। जानकारी के अनुसार, इसमें लगभग 3000 सैनिक, 5 युद्धपोत और 10 लड़ाकू विमान शामिल होंगे। यह तैनाती न केवल दोनों देशों की सैन्य ताकत को प्रदर्शित करेगी, बल्कि आपसी तालमेल और रणनीतिक समन्वय को भी मजबूत करेगी।

भारत और रूस के बीच रक्षा संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। रूस भारत का एक प्रमुख रक्षा साझेदार रहा है और कई महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों की आपूर्ति करता रहा है। ऐसे में ‘RELOS’ जैसे समझौते से दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग और गहरा होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करेगा। साथ ही, रूस के साथ सहयोग बढ़ने से क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। यह समझौता ऐसे समय में लागू हुआ है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं और देशों के बीच रक्षा सहयोग की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।

इस समझौते का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझने और बेहतर तालमेल स्थापित करने का अवसर मिलेगा। संयुक्त अभ्यासों के दौरान सैनिक आधुनिक तकनीकों और रणनीतियों का आदान-प्रदान कर सकेंगे, जिससे उनकी कार्यक्षमता में सुधार होगा।

सरकार के सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में इस समझौते के तहत और भी संयुक्त अभ्यास और ऑपरेशन आयोजित किए जाएंगे। इससे भारत की रक्षा क्षमता को और मजबूती मिलेगी और वह वैश्विक स्तर पर एक मजबूत सैन्य शक्ति के रूप में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ कर सकेगा।

कुल मिलाकर, ‘RELOS’ समझौता भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला कदम साबित हो सकता है। यह न केवल सैन्य सहयोग को मजबूत करेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक संबंधों को भी और गहरा बनाएगा।