महिला आरक्षण पर सियासी टकराव: ममता बनर्जी का PM मोदी के संबोधन पर तीखा हमला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संबोधन के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाते हुए महिला आरक्षण मुद्दे पर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने परिसीमन प्रक्रिया और राजनीतिक मंशा को लेकर गंभीर आरोप लगाए, जिससे सियासी बहस तेज हो गई है।

Apr 19, 2026 - 15:44
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महिला आरक्षण पर सियासी टकराव: ममता बनर्जी का PM मोदी के संबोधन पर तीखा हमला

UNITED NEWS OF ASIA.  नई दिल्ली/कोलकाता — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संबोधन के बाद देश की राजनीति में महिला आरक्षण को लेकर बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए।

ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर एक पोस्ट के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने देश को सच्चाई बताने के बजाय भ्रमित करने का प्रयास किया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है और बंगाल में इस तरह का “सियासी खेल” नहीं चलेगा।

दरअसल, महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधा था। इसके जवाब में विपक्षी दलों ने भी पलटवार शुरू कर दिया है। ममता बनर्जी ने अपने बयान में कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की पक्षधर रही है और इस पर सवाल उठाना गलत है।

उन्होंने कहा कि असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि उससे जुड़ी परिसीमन प्रक्रिया है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार महिलाओं को आगे कर अपने राजनीतिक हित साधने की कोशिश कर रही है। ममता ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस मुद्दे को सही तरीके से लागू करने के बजाय इसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है।

मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि अगर सरकार वास्तव में महिला आरक्षण को लेकर गंभीर थी, तो 28 सितंबर 2023 को विधेयक पारित होने के बाद इसे लागू करने में इतना समय क्यों लिया गया। उन्होंने पूछा कि चुनावी माहौल के बीच इसे अचानक प्राथमिकता क्यों दी गई और परिसीमन से जोड़कर इसे और जटिल क्यों बनाया गया।

ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री के संबोधन के तरीके पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इस तरह के महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद के पटल से बात करनी चाहिए, जहां जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति अनादर बताते हुए कहा कि इस तरह का संबोधन “कायरतापूर्ण और दोहरे मापदंड” को दर्शाता है।

इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। एक ओर जहां केंद्र सरकार महिला सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकता बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा करार दे रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन सकता है। खासकर जब कई राज्यों में चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में यह मुद्दा और भी अहम हो जाता है।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी और ममता बनर्जी के बीच यह बयानबाजी केवल एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि आने वाले चुनावी संघर्ष की झलक भी मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि यह मुद्दा संसद और जनता के बीच किस दिशा में आगे बढ़ता है।