सुशील सन्नी अग्रवाल ने बताया कि विभिन्न श्रमिक संगठनों से उन्हें जानकारी मिली है कि सरकार द्वारा योजनाओं की पात्रता अवधि और समय-सीमा को अनावश्यक रूप से बढ़ा दिया गया है। पहले जहां श्रमिकों को पंजीयन के 90 दिनों के भीतर योजनाओं का लाभ मिल जाता था, वहीं अब कई योजनाओं में यह अवधि बढ़ाकर एक से तीन वर्ष कर दी गई है। इससे गरीब और जरूरतमंद श्रमिक परिवारों को तत्काल सहायता नहीं मिल पा रही है।
उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में श्रमिकों को समय पर योजनाओं का लाभ दिया जाता था, लेकिन वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार में नोनी सशक्तिकरण योजना, दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना, छात्रवृत्ति योजना, श्रमिक सियान योजना और निःशुल्क कोचिंग योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में लाभ मिलने में अत्यधिक देरी हो रही है।
अग्रवाल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री आवास सहायता योजना, जो विशेष रूप से निर्माण श्रमिकों के लिए बनाई गई थी, उसका लाभ भी कई जिलों में श्रमिकों को नहीं दिया जा रहा है। इसके कारण हजारों पंजीकृत श्रमिक आज भी आवास सहायता से वंचित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लक्ष्य पूर्ति दिखाने के लिए कई जिलों में ऐसे लोगों का पंजीयन किया जा रहा है, जो वास्तव में निर्माण श्रमिक नहीं हैं। इससे वास्तविक श्रमिकों को मिलने वाली उपकर राशि का लाभ अपात्र लोगों तक पहुंच रहा है।
ई-केवाईसी को लेकर भी उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि ई-केवाईसी के नाम पर श्रमिकों को परेशान किया जा रहा है। यदि यह प्रक्रिया आवश्यक है, तो इसे गांवों के च्वाइस सेंटरों के माध्यम से कराए जाने की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि समय-सीमा में कार्य पूरा हो सके और श्रमिक योजनाओं से वंचित न रहें।
छात्रवृत्ति योजना को लेकर अग्रवाल ने बताया कि नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत हजारों आवेदन लंबित हैं। श्रमिकों के बच्चों को समय पर छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है। वहीं निःशुल्क कोचिंग योजना के तहत विद्यार्थियों को जिला स्तर पर ऑफलाइन कोचिंग देने के बजाय ऑनलाइन कोचिंग कराई जा रही है, जिससे ग्रामीण और कमजोर पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के तहत पहले श्रमिकों को 5 रुपये में गुणवत्तायुक्त भोजन उपलब्ध कराया जाता था, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में भोजन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में गिरावट आई है।
सुशील सन्नी अग्रवाल ने यह भी कहा कि प्रदेश में नई आबकारी नीति के तहत लगातार नई शराब दुकानों को खोला जा रहा है और धार्मिक पर्वों के दौरान भी शराब बिक्री की अनुमति दी जा रही है, जो समाज और श्रमिक परिवारों के लिए चिंता का विषय है।
अंत में उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सरकार बनेगी, तब श्रमिकों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को फिर से प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा और वास्तविक श्रमिकों को समय पर उनका हक दिलाया जाएगा।