कबीरधाम में RTE प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग, निजी स्कूलों का काली पट्टी बांधकर विरोध

कबीरधाम जिले में निजी स्कूलों ने RTE प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को लेकर काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध किया। एसोसिएशन ने 18 अप्रैल को एक दिवसीय स्कूल बंद का ऐलान भी किया है।

Apr 18, 2026 - 13:37
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कबीरधाम में RTE प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग, निजी स्कूलों का काली पट्टी बांधकर विरोध

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l  कबीरधाम जिले में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा इन दिनों सुर्खियों में है। निजी विद्यालयों ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कबीरधाम प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के आह्वान पर जिले भर के निजी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराया और अपने दैनिक कार्यों का निर्वहन किया।

यह विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इसके पीछे स्कूल संचालकों की गंभीर आर्थिक परेशानियां सामने आई हैं। एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान में शासन द्वारा दी जा रही RTE प्रतिपूर्ति राशि वास्तविक खर्चों के मुकाबले काफी कम है। इससे स्कूल प्रबंधन को वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जो लंबे समय में शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

निजी विद्यालय संचालकों के अनुसार, एक छात्र की शिक्षा पर होने वाला खर्च केवल पाठ्यपुस्तकों और शिक्षण सामग्री तक सीमित नहीं होता। इसमें शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन, स्कूल भवन का रखरखाव, बिजली-पानी के बिल, डिजिटल शिक्षण संसाधन, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और अन्य प्रशासनिक खर्च भी शामिल होते हैं। इन सभी खर्चों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान प्रतिपूर्ति राशि अपर्याप्त साबित हो रही है।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि शासन स्तर पर जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसी क्रम में 18 अप्रैल को जिले के सभी निजी विद्यालयों को एक दिन के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया है, ताकि शासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया जा सके।

हालांकि, निजी स्कूल प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य विद्यार्थियों की पढ़ाई में बाधा उत्पन्न करना नहीं है। उनका कहना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए उठाया जा रहा है। यदि स्कूलों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, तभी वे विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर पाएंगे।

इस विरोध के माध्यम से निजी विद्यालय संचालकों ने सरकार से आग्रह किया है कि RTE प्रतिपूर्ति राशि को वास्तविक खर्चों के अनुरूप संशोधित किया जाए। इससे न केवल स्कूलों का आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था भी सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी।

वर्तमान परिदृश्य में यह मुद्दा शिक्षा से जुड़े सभी पक्षों के लिए महत्वपूर्ण बन गया है। अब यह देखना बाकी है कि शासन इस मांग पर कितनी गंभीरता से विचार करता है और कब तक कोई सकारात्मक निर्णय लिया जाता है। कबीरधाम में निजी स्कूलों का यह विरोध शिक्षा क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।