कबीरधाम में RTE प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग तेज, निजी स्कूलों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
कबीरधाम जिले में निजी स्कूलों ने RTE प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को लेकर काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध किया। एसोसिएशन ने 18 अप्रैल को एक दिवसीय स्कूल बंद की चेतावनी भी दी है।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l कबीरधाम जिले में शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा एक अहम मुद्दा इन दिनों चर्चा में है, जहां निजी स्कूलों ने RTE (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कबीरधाम प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के आह्वान पर जिले के सभी निजी विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध जताया और अपने दायित्वों का निर्वहन किया।
यह विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक था, लेकिन इसके पीछे निजी विद्यालयों की गंभीर आर्थिक चिंताएं जुड़ी हुई हैं। एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान में शासन द्वारा दी जा रही RTE प्रतिपूर्ति राशि वास्तविक खर्चों के अनुरूप नहीं है, जिससे स्कूल प्रबंधन पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
निजी स्कूल संचालकों के अनुसार, एक छात्र की शिक्षा पर होने वाला खर्च केवल किताबों और शिक्षण तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें शिक्षकों का वेतन, भवन का रखरखाव, बिजली-पानी, डिजिटल संसाधन, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी और अन्य प्रशासनिक खर्च भी शामिल होते हैं। मौजूदा प्रतिपूर्ति राशि इन सभी खर्चों को पूरा करने में अपर्याप्त साबित हो रही है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार इस मुद्दे पर शीघ्र निर्णय नहीं लेती है, तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसी कड़ी में 18 अप्रैल को जिले के सभी निजी विद्यालयों को एक दिवसीय बंद रखने का निर्णय लिया गया है, ताकि शासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया जा सके।
हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य विद्यार्थियों की पढ़ाई को बाधित करना नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और स्थायी बनाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। उनका मानना है कि यदि स्कूलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, तभी वे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर पाएंगे।
इस विरोध के माध्यम से निजी स्कूल संचालक सरकार से यह अपेक्षा कर रहे हैं कि RTE प्रतिपूर्ति की राशि को वास्तविक खर्चों के अनुसार संशोधित किया जाए, ताकि स्कूलों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम किया जा सके और शिक्षा व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह मुद्दा न केवल निजी स्कूलों बल्कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी हितधारकों के लिए महत्वपूर्ण बन गया है। अब देखना यह होगा कि शासन इस मांग पर कितनी जल्दी और किस प्रकार का निर्णय लेता है।
कबीरधाम के निजी विद्यालयों द्वारा किया गया यह विरोध शिक्षा क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों और समाधान की आवश्यकता की ओर स्पष्ट संकेत देता है।