कवर्धा में मलेरिया नियंत्रण अभियान तेज, 40 हजार से अधिक लोगों की हुई जांच

कवर्धा जिले में मलेरिया नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक अभियान चलाया है। झलमला, रेंगाखार और आसपास के गांवों में विशेष स्वास्थ्य दल घर-घर सर्वे, रैपिड टेस्ट और निःशुल्क उपचार कर संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण में जुटे हैं। विभाग ने बताया कि अब तक 40 हजार से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है।

Jul 30, 2026 - 15:28
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कवर्धा में मलेरिया नियंत्रण अभियान तेज, 40 हजार से अधिक लोगों की हुई जांच

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा जिले में मलेरिया की रोकथाम और नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय है। जिले के मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य दलों की तैनाती कर घर-घर सर्वे, रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट, रक्तपट्टी जांच और संक्रमित मरीजों के निःशुल्क उपचार का अभियान लगातार चलाया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर भी किया जा रहा है, जिससे समय पर उपचार सुनिश्चित हो सके।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी जून माह से मलेरिया सर्वे अभियान संचालित किया जा रहा है। अब तक जिले में 40 हजार से अधिक लोगों की घर-घर जाकर जांच की जा चुकी है। इस दौरान बुखार, सर्दी और खांसी जैसे लक्षण वाले लोगों की भी जांच कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया। सर्वे के दौरान लगभग 10 से 12 गांवों में मलेरिया के कुछ मामले सामने आए, जिनका समय पर उपचार कर संक्रमण को नियंत्रित कर लिया गया।

पिछले एक सप्ताह के दौरान झलमला और रेंगाखार सेक्टर में 20 हजार से अधिक लोगों की मलेरिया जांच की गई है। सेक्टर सुपरवाइजर के नेतृत्व में 15 से 20 सर्वे दल लगातार झलमला, रेंगाखार और आसपास के गांवों में सक्रिय हैं। इन दलों में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और मितानिन शामिल हैं। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झलमला, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रेंगाखार और चिल्फी सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र रायपुर की विशेषज्ञ टीम भी जिले के मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में पैरासाइटोलॉजी और एंटोमोलॉजी से जुड़े तकनीकी अध्ययन कर रही है, ताकि रोग नियंत्रण की रणनीति को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

स्वास्थ्य विभाग प्रभावित क्षेत्रों में मच्छरदानियों के उपयोग को बढ़ावा देने, लार्वा नियंत्रण, जल स्रोतों के क्लोरीनेशन और कीटनाशक छिड़काव जैसी गतिविधियां भी चला रहा है। साथ ही राज्य कार्यालय को कीटनाशकयुक्त मच्छरदानियों और अतिरिक्त छिड़काव की कार्ययोजना भेजी जा चुकी है। ग्रामीण भी नीम की पत्तियों का धुआं जैसे पारंपरिक उपाय अपनाकर मच्छरों से बचाव कर रहे हैं। मितानिन और स्वास्थ्य कार्यकर्ता लगातार लोगों को बुखार होने पर तत्काल जांच कराने और चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाओं का पूरा कोर्स लेने के लिए जागरूक कर रहे हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी. के. तूरे ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को बुखार आने पर निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में तुरंत मलेरिया की जांच कराएं। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और उपचार से मलेरिया को गंभीर होने से रोका जा सकता है। विभाग के अनुसार वर्तमान में जिले की स्थिति नियंत्रण में है तथा मलेरिया से किसी भी मृत्यु की पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी रखते हुए सभी आवश्यक रोकथाम और नियंत्रण उपाय प्रभावी ढंग से संचालित कर रहा है।