दुर्ग ट्रिपल मर्डर केस में बड़ा फैसला: आरोपी रवि शर्मा को फांसी की सजा

दुर्ग जिले के चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में कोर्ट ने 6 साल बाद फैसला सुनाते हुए आरोपी रवि शर्मा को फांसी की सजा दी है। अदालत ने मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मानते हुए यह निर्णय सुनाया।

May 1, 2026 - 14:41
 0  1
दुर्ग ट्रिपल मर्डर केस में बड़ा फैसला: आरोपी रवि शर्मा को फांसी की सजा

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l दुर्ग जिले के बहुचर्चित ट्रिपल मर्डर केस में आखिरकार लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। वर्ष 2020 में हुए इस सनसनीखेज तिहरे हत्याकांड में दुर्ग की अदालत ने आरोपी रवि शर्मा को मौत की सजा सुनाई है। करीब छह साल बाद आए इस फैसले से मृतकों के परिजनों को न्याय मिला है और क्षेत्र में इस निर्णय को लेकर चर्चा का माहौल है।

यह फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यशवंत कुमार सारथी द्वारा सुनाया गया। अदालत ने मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” श्रेणी में रखते हुए आरोपी को फांसी की सजा देने का निर्णय लिया। इस मामले में शासकीय वकील भावेश कटरे ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया गया। 

घटना 17 जनवरी 2020 की है, जब भिलाई के तालपुरी स्थित पारिजात कॉलोनी में यह जघन्य अपराध सामने आया था। जांच में सामने आया कि आरोपी रवि शर्मा ने सुनियोजित तरीके से अपनी पत्नी मंजू शर्मा, डेढ़ माह की मासूम बच्ची और एक मानसिक रूप से कमजोर युवक की हत्या की थी। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी पहले से शादीशुदा था और उसकी पहली पत्नी व बच्चे राउरकेला में रहते थे। इसके बावजूद उसने भिलाई में मंजू शर्मा से दूसरी शादी की थी। बच्ची के जन्म के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ने लगे, जिससे परेशान होकर उसने इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया।

जानकारी के अनुसार, आरोपी ने पहले एक अज्ञात युवक को शराब में नशीली दवा मिलाकर बेहोश किया और फिर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसने अपनी पत्नी को भी नींद की दवा देकर गला घोंटकर मार डाला। वहीं, मासूम बच्ची को भी नहीं बख्शा गया और उसकी भी हत्या कर दी गई। यह पूरा घटनाक्रम अत्यंत क्रूर और अमानवीय था।

हत्या के बाद आरोपी ने सबूत मिटाने की कोशिश भी की। उसने शवों को जलाने और गैस सिलेंडर के जरिए विस्फोट कर घटना को दुर्घटना का रूप देने की योजना बनाई, लेकिन उसकी यह साजिश सफल नहीं हो सकी। पुलिस ने मौके से मिले साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर मामले की तह तक पहुंचने में सफलता हासिल की।

जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल्स, जब्त सामान और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के आधार पर आरोपी के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाए गए। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और अदालत में पेश किया। सुनवाई के दौरान सभी तथ्यों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार दिया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध अत्यंत जघन्य और समाज को झकझोर देने वाला है, इसलिए इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मानते हुए कठोरतम सजा दी जाती है। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की भावना है, वहीं समाज में भी इस तरह के अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश गया है।

यह मामला कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है, जहां देर से ही सही, लेकिन दोषी को उसके अपराध की सजा मिलती है।