राष्ट्रपति भवन में गूंजी धमतरी की मांदर थाप, सरईटोला के कलाकारों ने राष्ट्रीय मंच पर बिखेरी छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के सेंट्रल हॉल में धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम सरईटोला (गुडरापार) के ‘जय गढ़िया बाबा आदिवासी लोक मांदरी नृत्य दल’ ने पारंपरिक लोकनृत्य की प्रस्तुति दी। मांदर की थाप, लोकगीत, पारंपरिक वेशभूषा और नृत्य के माध्यम से कलाकारों ने राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक एवं आदिवासी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की।

Aug 19, 2026 - 10:57
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राष्ट्रपति भवन में गूंजी धमतरी की मांदर थाप, सरईटोला के कलाकारों ने राष्ट्रीय मंच पर बिखेरी छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी लोककला, लोकसंगीत और सांस्कृतिक परंपराओं की सशक्त झलक स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के सेंट्रल हॉल में देखने को मिली। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम सरईटोला (गुडरापार) के ‘जय गढ़िया बाबा आदिवासी लोक मांदरी नृत्य दल’ ने 15 अगस्त को पारंपरिक लोकनृत्य की मनोहारी प्रस्तुति देकर राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को गौरवान्वित किया।

राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित संवैधानिक परिसर में मांदर की थाप, पारंपरिक गीतों और सामूहिक नृत्य की लय ने वातावरण को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के रंगों से भर दिया। ग्रामीण अंचल से जुड़े कलाकारों के लिए यह अवसर उनकी कला-साधना के सम्मान के साथ-साथ धमतरी जिले और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण रहा।

सरईटोला का लोक नृत्य दल अपनी पारंपरिक नृत्य शैली, गुट्टा मांदर की ऊर्जावान थाप, लोकगीतों, पारंपरिक वेशभूषा और लोक वाद्यों के लिए जाना जाता है। दल की प्रस्तुतियों में आदिवासी समाज के लोकजीवन, उत्सव, सामाजिक सरोकार, सामुदायिक एकता और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान, आभूषण और साज-सज्जा कलाकारों की प्रस्तुति को और आकर्षक बनाते हैं।

यह लोकनृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि लोक स्मृतियों, सामाजिक जुड़ाव और सांस्कृतिक पहचान को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। फसल कटाई, उत्सव, मेले और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक अवसरों पर इसकी प्रस्तुति की परंपरा रही है।

दल के सचिव रूपराय नेताम ने बताया कि नागपुर सांस्कृतिक भवन द्वारा दल की उत्कृष्ट प्रस्तुति और पारंपरिक कला की विशिष्टता को देखते हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति के लिए चयन किया गया। उन्होंने कहा कि देश के प्रतिष्ठित मंच पर छत्तीसगढ़ की लोककला का प्रतिनिधित्व करना कलाकारों के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान का विषय है।

इस ऐतिहासिक अवसर पर सरईटोला के रतन लाल निषाद, सुरेंद्र सोरी, हेमंत सोरी, सुलोचना सोरी और मधु नेताम सहित दल के कलाकारों ने नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का प्रतिनिधित्व किया। ग्रामीण अंचल से निकलकर राष्ट्रीय राजधानी के प्रतिष्ठित मंच तक पहुंची कलाकारों की यह यात्रा इस बात का उदाहरण है कि लोककला अपनी मौलिकता और जीवंतता के कारण आज भी व्यापक पहचान रखती है।

कलेक्टर मिश्रा ने कलाकारों और समिति के सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राष्ट्रीय मंच पर धमतरी जिले की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी कला का प्रदर्शन पूरे जिले के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसी उपलब्धियां जिले की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देने के साथ युवा पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं से जुड़ने और उन्हें आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती हैं।

उन्होंने कहा कि धमतरी की पहचान केवल प्राकृतिक और कृषि समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की लोककला, लोकसंगीत, जनजातीय परंपराएं और सांस्कृतिक विविधता भी जिले की अमूल्य धरोहर हैं। सरईटोला के कलाकारों की राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति इस सांस्कृतिक विरासत को देश के सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर बनी है।

धमतरी के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्य और विभिन्न उत्सवों से जुड़ी अनेक सांस्कृतिक परंपराएं आज भी जीवंत हैं। ऐसे कलाकारों को राष्ट्रीय मंच और पहचान मिलना इन परंपराओं के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

राष्ट्रपति भवन में हुई यह प्रस्तुति केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही, बल्कि धमतरी की माटी, छत्तीसगढ़ की लोक आत्मा और पीढ़ियों से संजोई गई आदिवासी सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय अभिव्यक्ति बनी। सरईटोला के कलाकारों की मांदर थाप ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को देश के प्रतिष्ठित मंच पर नई पहचान दिलाई और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा दी।