आजीविका डबरी से आत्मनिर्भर हुआ रामभजन का परिवार, सब्जी उत्पादन और मछली पालन से बढ़ी आमदनी

कवर्धा जिले के बोड़ला जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पोड़ी निवासी रामभजन के परिवार को आजीविका डबरी से सिंचाई और रोजगार का नया साधन मिला है। डबरी निर्माण के बाद सब्जी उत्पादन और मछली पालन से परिवार की आय में वृद्धि हुई है। सब्जी बिक्री से हर सप्ताह 800 से 900 रुपये तक आमदनी हो रही है।

Oct 4, 2026 - 17:47
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आजीविका डबरी से आत्मनिर्भर हुआ रामभजन का परिवार, सब्जी उत्पादन और मछली पालन से बढ़ी आमदनी

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित आय और सिंचाई संसाधनों की कमी के कारण खेती से अपेक्षित आमदनी नहीं हो पाती। ऐसे में जल संरक्षण और आजीविका से जुड़े कार्य ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक उन्नति का माध्यम बन रहे हैं। कवर्धा जिले के जनपद पंचायत बोड़ला अंतर्गत ग्राम पंचायत पोड़ी निवासी रामभजन के परिवार की कहानी इसका उदाहरण है। आजीविका डबरी के निर्माण के बाद रामभजन के परिवार को सिंचाई, सब्जी उत्पादन और मछली पालन के लिए बेहतर अवसर मिला है।

रामभजन की मांग पर विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत 1.80 लाख रुपये की लागत से आजीविका डबरी का निर्माण कराया गया। इससे पहले रामभजन के पास लगभग 50 डिसमिल भूमि उपलब्ध थी, लेकिन सिंचाई का पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण इसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा था। डबरी निर्माण के बाद उन्हें रोजगार के साथ-साथ सिंचाई का स्थायी स्रोत भी मिला।

इस कार्य में 1 लाख 66 हजार रुपये का मजदूरी भुगतान किया गया और कुल 697 मानव दिवस रोजगार का सृजन हुआ। इससे रामभजन के परिवार के साथ अन्य ग्रामीणों को भी रोजगार मिला। आजीविका डबरी के निर्माण से आसपास के करीब एक एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विस्तार हुआ। साथ ही भू-जल स्तर बढ़ाने और हैंडपंप रिचार्ज में भी सहायता मिलने की बात सामने आई है।

डबरी बनने से रामभजन की कृषि गतिविधियों में भी बदलाव आया है। पहले वर्षा आधारित खेती और सीमित पानी के कारण उनकी वार्षिक आय करीब 8 से 10 हजार रुपये तक ही सीमित थी। सिंचाई सुविधा मिलने के बाद उन्होंने सब्जी उत्पादन के साथ मछली पालन को भी आजीविका का साधन बनाया।

रामभजन के खेत में बरबट्टी, टमाटर, लौकी, भिंडी, कद्दू, फूलगोभी, गवारफली, केला, कर्मत्ता भाजी और धनिया जैसी विभिन्न फसलों का उत्पादन किया जा रहा है। वे घर से कुछ दूरी पर स्थित पोड़ी बाजार में सब्जियों की बिक्री करते हैं। उनके अनुसार जैविक तरीके से तैयार सब्जियां आसानी से बिक जाती हैं और इससे प्रत्येक सप्ताह 800 से 900 रुपये तक की आमदनी हो रही है। महीने में लगभग 3500 से 4000 रुपये की आय सब्जी उत्पादन से प्राप्त हो रही है।
रामभजन ने डबरी में मछली पालन भी शुरू किया है। इससे उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 60 से 70 हजार रुपये की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है। सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से अब खेती और मछली पालन दोनों गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाने का अवसर मिला है।

रामभजन का कहना है कि पहले सिंचाई के अभाव में सब्जी उत्पादन संभव नहीं था, लेकिन आजीविका डबरी बनने के बाद उनकी आय के नए स्रोत विकसित हुए हैं। बढ़ी हुई आमदनी से वे अपने परिवार की जरूरतों को पहले की तुलना में बेहतर तरीके से पूरा कर पा रहे हैं।

आजीविका डबरी का यह कार्य जल संरक्षण, कृषि विविधीकरण और ग्रामीण रोजगार के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। इससे न केवल एक परिवार को लाभ मिला है, बल्कि आसपास के क्षेत्र में भी सिंचाई सुविधा का विस्तार हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी टिकाऊ परिसंपत्तियों के माध्यम से रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।