प्रचार-प्रसार के खर्च को लेकर कांग्रेस का सरकार पर निशाना, जनहित बनाम विज्ञापन पर उठाए सवाल

प्रचार-प्रसार पर सरकारी खर्च को लेकर कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि सरकार जनहित की योजनाओं की तुलना में विज्ञापन और प्रचार पर अधिक ध्यान दे रही है तथा जनता के धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।

Jul 30, 2026 - 13:54
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प्रचार-प्रसार के खर्च को लेकर कांग्रेस का सरकार पर निशाना, जनहित बनाम विज्ञापन पर उठाए सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ सरकार के प्रचार-प्रसार पर होने वाले खर्च को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि जनहित की योजनाओं की अपेक्षा विज्ञापन और प्रचार-प्रसार पर अधिक राशि खर्च की जा रही है। पार्टी का कहना है कि जनता के टैक्स के पैसे का उपयोग विकास कार्यों के बजाय सरकार की छवि निर्माण में किया जा रहा है।

कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सरकार लगातार "सबका साथ, सबका विकास" का नारा देती है, लेकिन वास्तविकता में प्रचार-प्रसार पर बढ़ते खर्च कई सवाल खड़े कर रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि जिन योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं हो पाता, उनसे कहीं अधिक राशि विज्ञापनों और प्रचार अभियानों पर खर्च की जा रही है।

बयान में यह भी कहा गया कि यदि सरकारी संसाधनों का बड़ा हिस्सा प्रचार-प्रसार पर खर्च होगा तो शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर इसका असर पड़ सकता है। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि प्रचार पर होने वाले खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए और प्राथमिकता जनहित के कार्यों को दी जाए।

विपक्ष का कहना है कि सरकार को विकास कार्यों के परिणामों के आधार पर जनता का विश्वास हासिल करना चाहिए, न कि केवल विज्ञापन अभियानों के माध्यम से। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकारी उपलब्धियों के प्रचार में भारी खर्च किया जा रहा है, जबकि कई क्षेत्रों में लोग अब भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार पहले भी विभिन्न अवसरों पर यह कहती रही है कि जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रचार-प्रसार आवश्यक है, ताकि पात्र हितग्राही योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

यह मामला फिलहाल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बना हुआ है। प्रचार-प्रसार पर वास्तविक खर्च, उसका उद्देश्य और प्रभाव जैसे मुद्दों पर अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक दस्तावेजों, बजट अभिलेखों और संबंधित विभागों की जानकारी के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा। विपक्ष जहां इसे जनता के धन के दुरुपयोग का मुद्दा बता रहा है, वहीं सरकार की ओर से संभावित रूप से इसे जनकल्याणकारी योजनाओं के व्यापक प्रचार का हिस्सा बताया जा सकता है। ऐसे में इस विषय पर तथ्यात्मक जानकारी और आधिकारिक आंकड़ों का सामने आना महत्वपूर्ण होगा।