छिंदवाड़ा के प्रगतिशील किसान सूरज माहोर की जुगाड़ टेक्नोलॉजी बनी किसानों के लिए वरदान, कम क्षमता में चलाए 106 मिनी स्प्रिंकलर

छिंदवाड़ा जिले में प्रगतिशील किसान सूरज माहोर द्वारा विकसित जुगाड़ टेक्नोलॉजी से सिंचाई का अभिनव प्रयोग सामने आया है। उपसंचालक कृषि जितेंद्र सिंह ने अवलोकन कर इस तकनीक को कम संसाधनों में अधिक सिंचाई क्षमता वाला बताया, जो किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।

Jan 15, 2026 - 15:25
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छिंदवाड़ा के प्रगतिशील किसान सूरज माहोर की जुगाड़ टेक्नोलॉजी बनी किसानों के लिए वरदान, कम क्षमता में चलाए 106 मिनी स्प्रिंकलर

UNITED NEWS OF ASIA.वीरन लालयादव , छिंदवाड़ा। जिले में किसानों द्वारा अपनाई जा रही नवाचारी तकनीकों की श्रृंखला में एक उल्लेखनीय उदाहरण सामने आया है। आज उपसंचालक कृषि  जितेंद्र सिंह ने जिले के उन्नतशील एवं प्रगतिशील कृषक  सूरज माहोर द्वारा अपनाई गई अनूठी जुगाड़ टेक्नोलॉजी आधारित सिंचाई प्रणाली का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इस दौरान खेत में एक साथ 106 मिनी स्प्रिंकलर चलते हुए देखे गए, जो सभी उपस्थित किसानों और कृषि अधिकारियों के लिए कौतूहल और प्रेरणा का विषय रहा।

अवलोकन के दौरान किसान सूरज माहोर ने जानकारी दी कि सामान्य रूप से मिनी स्प्रिंकलर प्रणाली में 30 से 40 स्प्रिंकलर चलाने के लिए 5 हॉर्स पावर (एचपी) की मोटर की आवश्यकता होती है। किंतु उन्होंने अपनी सूझबूझ और तकनीकी समझ का उपयोग करते हुए कंप्रेसर आधारित जुगाड़ तकनीक विकसित की, जिससे उसी क्षमता की मोटर पर एक साथ 106 मिनी स्प्रिंकलर सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। इससे न केवल सिंचाई क्षेत्र में विस्तार हुआ है, बल्कि पानी, बिजली और लागत—तीनों की बचत भी सुनिश्चित हो रही है।

उपसंचालक कृषि  जितेंद्र सिंह ने इस नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि यह तकनीक छोटे और मध्यम किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो सकती है। सीमित संसाधनों में अधिक क्षेत्र की सिंचाई कर पाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और यह प्रयोग उसी दिशा में एक प्रभावी कदम है। उन्होंने इसे किसानों की व्यावहारिक बुद्धिमत्ता और नवाचार क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

अवलोकन कार्यक्रम में  सुंदरलाल नागवंशी,  अरविंद पटेल एवं  यशवंत असराठी भी उपस्थित रहे। सभी ने एकमत से इस तकनीक को प्रदेशभर के किसानों तक पहुंचाने का संकल्प लिया, ताकि अधिक से अधिक कृषक इस पद्धति को अपनाकर सिंचाई लागत कम कर सकें और उत्पादन में वृद्धि कर सकें।

किसान सूरज माहोर का यह प्रयास दर्शाता है कि यदि किसान नवाचार के लिए आगे आएं और स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग करें, तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। यह जुगाड़ टेक्नोलॉजी आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में एक नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।