जल–जंगल–जमीन और आदिवासी संस्कृति पर आधारित छत्तीसगढ़ी फिल्म “दण्डाकोटुम” की शूटिंग बस्तर में प्रारंभ

छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति, जल–जंगल–जमीन और पेन-पुरखा परंपराओं पर आधारित फिल्म “दण्डाकोटुम” की शूटिंग बस्तर के वनांचल में शुरू हो गई है। जोहार फिल्म्स और कोया फिल्म प्रोडक्शन द्वारा निर्मित इस फिल्म के निर्देशक अमलेश नागेश और निर्माता रमेशचंद्र श्याम हैं। फिल्म की शुरुआत दमकसा आश्रम से दादा शेर सिंह आचला के आशीर्वाद के साथ हुई।

Oct 30, 2025 - 15:56
 0  8
जल–जंगल–जमीन और आदिवासी संस्कृति पर आधारित छत्तीसगढ़ी फिल्म “दण्डाकोटुम” की शूटिंग बस्तर में प्रारंभ

UNITED NEWS OF ASIA. श्रीदाम ढाली, भानुप्रतापपुर। छत्तीसगढ़ की धरती एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक जड़ों और प्राकृतिक धरोहर को पर्दे पर सजीव करने जा रही है। जोहार फिल्म्स प्रोडक्शन और कोया फिल्म प्रोडक्शन के संयुक्त बैनर तले बनने वाली नई छत्तीसगढ़ी फिल्म “दण्डाकोटुम” की शूटिंग का शुभारंभ 25 अक्टूबर 2025 से बस्तर के घने वनांचल क्षेत्रों में किया गया है।

फिल्म की शुरुआत दमकसा आश्रम से हुई, जहाँ फिल्म की टीम ने दादा शेर सिंह आचला से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर निर्माता तिरु. रमेशचंद्र श्याम और निर्देशक तिरु. अमलेश नागेश ने कहा कि यह फिल्म छत्तीसगढ़ के मूल आदिवासी जीवन, उनके विश्वास, परंपरा और प्रकृति के प्रति सम्मान को केंद्र में रखकर बनाई जा रही है।

फिल्म “दण्डाकोटुम” का कथानक जल–जंगल–जमीन की उस पवित्र त्रयी पर आधारित है, जो आदिवासी समाज के अस्तित्व की पहचान है। इसमें यह दिखाया जाएगा कि किस प्रकार बस्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदाय प्रकृति को पूजनीय मानते हैं और पेन-पुरखा, बुढ़ादेव जैसे देव स्वरूपों के माध्यम से पर्यावरण के संरक्षण और सह-अस्तित्व का संदेश देते हैं।

निर्देशक अमलेश नागेश के अनुसार, फिल्म की कहानी सिर्फ एक कथानक नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक दस्तावेज है — जो आने वाली पीढ़ियों को यह समझाएगी कि जंगल केवल जीवनयापन का साधन नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा और आत्मिक संबंध का प्रतीक है।

फिल्म की शूटिंग बस्तर, नारायणपुर, और कोंडागांव के दुर्गम इलाकों में होगी। फिल्म में स्थानीय कलाकारों, लोकगायकों और पारंपरिक नर्तकों को भी प्रमुख भूमिका में शामिल किया गया है ताकि छत्तीसगढ़ी संस्कृति की मौलिकता बरकरार रहे।

निर्माता रमेशचंद्र श्याम ने बताया कि “दण्डाकोटुम” न सिर्फ मनोरंजन का माध्यम होगी बल्कि छत्तीसगढ़ की आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और पर्यावरणीय संतुलन का जीवंत संदेश भी देगी। यह फिल्म 2026 के मध्य तक रिलीज के लिए प्रस्तावित है।

इस प्रकार “दण्डाकोटुम” छत्तीसगढ़ी सिनेमा को एक नई दिशा देने के साथ-साथ जल–जंगल–जमीन और परंपरा की उस आत्मा को अभिव्यक्त करेगी, जो बस्तर की पहचान है।