राज्योत्सव के समापन दिवस पर स्टार नाइट, पं. विवेक शर्मा की सुरमयी प्रस्तुति में गूंजेंगे छत्तीसगढ़ी गीत

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव रजत जयंती समारोह के समापन दिवस पर कवर्धा में आज भव्य “स्टार नाइट” का आयोजन होगा। प्रसिद्ध गायक पं. विवेक शर्मा एवं उनके साथी कलाकार छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की प्रस्तुति देंगे, जिनमें “मोर छत्तीसगढ़ महतारी”, “बैला के घाघर” और “मोला बेटा कहिके बुलाए वो” जैसे लोकप्रिय गीत शामिल रहेंगे। उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित यह संध्या छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोकधुनों और परंपरा का उत्सव बनेगी।

Nov 4, 2025 - 16:28
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राज्योत्सव के समापन दिवस पर स्टार नाइट, पं. विवेक शर्मा की सुरमयी प्रस्तुति में गूंजेंगे छत्तीसगढ़ी गीत

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव रजत जयंती समारोह का तीसरा और अंतिम दिन आज कवर्धा के लिए एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक संध्या लेकर आ रहा है।

 
उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित तीन दिवसीय राज्योत्सव का समापन “स्टार नाइट” के साथ होगा, जिसमें प्रदेश के सुप्रसिद्ध गायक पंडित विवेक शर्मा और उनके साथी कलाकार छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुति देंगे।


राजधानी रायपुर से लेकर कबीरधाम तक अपनी संगीत प्रतिभा से पहचान बना चुके पं. विवेक शर्मा अपनी गायकी से दर्शकों को छत्तीसगढ़ी लोकधुनों की सुगंध में सराबोर कर देंगे। इस अवसर पर वे “मोर छत्तीसगढ़ महतारी तोला बार-बार प्रणाम हे”, “बैला के घाघर” और “मोला बेटा कहिके बुलाए वो” जैसे लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी गीत प्रस्तुत करेंगे। इन गीतों की मधुर धुन और भावपूर्ण बोल श्रोताओं को अपनी संस्कृति, परंपरा और मातृभूमि की स्मृतियों से जोड़ देंगे।

 

राज्योत्सव के इस समापन कार्यक्रम को लेकर पूरे कबीरधाम जिले में उत्साह का माहौल है। नगर के नागरिक, कलाकार और संगीत प्रेमी बड़ी संख्या में इस आयोजन में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। पीजी कॉलेज मैदान कवर्धा को रंगीन रोशनी, पारंपरिक छत्तीसगढ़ी सजावट और झिलमिलाते झंडों से सुसज्जित किया गया है।

पहले दो दिनों में जहां लोककला, हस्तशिल्प प्रदर्शनी और पारंपरिक नृत्यों ने दर्शकों को आकर्षित किया, वहीं समापन दिवस की यह सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम को चरम पर ले जाएगी। जब पं. विवेक शर्मा की आवाज़ में “मोर छत्तीसगढ़ महतारी...” गीत गूंजेगा, तब पूरा मैदान लोकगर्व और उत्साह से झूम उठेगा।

इस मौके पर जिले के जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, कलाकार एवं नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन न केवल राज्योत्सव के समापन का प्रतीक होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, लोकधरोहर और स्वाभिमान का जीवंत उत्सव भी बनेगा।

राज्योत्सव की यह अंतिम शाम छत्तीसगढ़ की माटी की महक, लोकसंगीत की मधुरता और एकता के भाव से ओतप्रोत होकर आने वाले वर्षों तक लोगों के मन में यादों के रूप में अंकित रहेगी।