प्रदेश सरकार के सौतेले व्यवहार से अनियमित कर्मचारी आक्रोशित, 8 वर्षों से न्यूनतम वेतन नहीं बढ़ा: गोपाल प्रसाद साहू
छत्तीसगढ़ प्रदेश में कार्यरत लगभग 7 लाख अनियमित कर्मचारी प्रदेश सरकार के सौतेले व्यवहार से आक्रोशित हैं। अनियमित कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू ने आरोप लगाया कि पिछले 8 वर्षों से न्यूनतम वेतन और ढाई वर्षों से संविदा वेतन में कोई वृद्धि नहीं की गई, जबकि नियमित कर्मचारियों को लगातार वेतनवृद्धि और महंगाई भत्ता दिया जा रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. हसिब अख्तर, रायपुर | प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में कार्यरत लाखों अनियमित कर्मचारी—जिनमें संविदा, दैनिक वेतनभोगी, मानदेय, जॉब दर, अंशकालीन, आउटसोर्सिंग, ठेका, सेवा प्रदाता तथा समूह–समिति के माध्यम से नियोजित कर्मचारी शामिल हैं—प्रदेश सरकार के कथित सौतेले और शोषणकारी व्यवहार से गहरे आक्रोश में हैं। यह आरोप अनियमित कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू ने एक प्रेस बयान के माध्यम से लगाया।
गोपाल प्रसाद साहू ने बताया कि इन कर्मचारियों का वेतन श्रम विभाग द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन एवं वित्त विभाग द्वारा तय एकमुश्त संविदा वेतन के आधार पर निर्धारित किया जाता है, जो नियमित कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन से आधे से भी कम है। इसके बावजूद पिछले 8 वर्षों से न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण नहीं किया गया, वहीं ढाई वर्षों से संविदा वेतन में भी कोई वृद्धि नहीं की गई। दूसरी ओर नियमित कर्मचारियों को समय-समय पर वेतनवृद्धि एवं महंगाई भत्ते का लाभ लगातार दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 7 लाख अनियमित कर्मचारी पिछले 5 वर्षों से लेकर 25–30 वर्षों तक निरंतर शासन की जनहितकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें “अनियमित कर्मचारी” कहकर उपेक्षित किया जा रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में इनकी स्थिति मध्यकालीन बंधुआ मजदूरों से भी बदतर हो गई है। पारिवारिक जिम्मेदारियां, आर्थिक असुरक्षा, बेरोजगारी और प्रशासनिक दबाव के चलते ये कर्मचारी अपने साथ हो रहे अन्याय को सहने के लिए विवश हैं।
प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि श्रम संहिता 2019 लागू होने के बावजूद 2017 के बाद से न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण नहीं किया गया, न ही भारत सरकार के लेबर ब्यूरो, शिमला द्वारा जारी सूचकांक के अनुसार न्यूनतम वेतन के महंगाई भत्ते में वृद्धि की गई है। इसके विपरीत नियमित कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव पूर्व अनियमित कर्मचारियों को समाधान का भरोसा दिया गया था, लेकिन “मोदी की गारंटी 2023” में उल्लेखित समिति में अनियमित कर्मचारियों को शामिल नहीं किया गया। मुख्यमंत्री द्वारा समिति गठन की घोषणाएं भी अब तक अमल में नहीं लाई गई हैं। जुलाई 2023 में घोषित 27 प्रतिशत संविदा वेतन वृद्धि और श्रम सम्मान राशि भी अधिकांश कार्यालयों में कर्मचारियों को नहीं दी जा रही है।
अंत में गोपाल प्रसाद साहू ने सरकार से मांग की कि न्यूनतम वेतन का तत्काल पुनरीक्षण किया जाए, संविदा वेतन में वृद्धि की जाए, अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए, निकाले गए कर्मचारियों की बहाली हो तथा आउटसोर्सिंग और ठेका प्रणाली समाप्त कर विभागीय समायोजन की ठोस पहल की जाए।