छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने मोदी गारंटी न पूरी होने पर तीन दिवसीय हड़ताल शुरू की

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने मोदी की गारंटी के तहत वादों का पालन न होने के विरोध में 29 से 31 दिसंबर 2025 तक तीन दिवसीय हड़ताल शुरू की। हड़ताल के दौरान सभी जिला मुख्यालयों में कार्यालय बंद रहे, जिससे शासन की योजनाओं और विभागीय कार्य प्रभावित हुए।

Dec 30, 2025 - 13:14
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छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने मोदी गारंटी न पूरी होने पर तीन दिवसीय हड़ताल शुरू की

UNITED NEWS OF ASIA.रामकुमार भारद्वाज, कोंडागांव। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने मोदी की गारंटी के तहत वादों का पालन न होने के विरोध में 29 दिसंबर 2025 से तीन दिवसीय निश्चित कालीन हड़ताल की शुरुआत की। यह हड़ताल 31 दिसंबर तक जारी रहेगी। फेडरेशन के अनुसार, छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सत्ता में आने से पहले केंद्र और राज्य स्तर पर कर्मचारियों को कई वादे किए गए थे, जिन्हें अब तक पूरा नहीं किया गया।

हड़ताल के पहले दिन राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में विभागीय कार्यालय बंद रहे। स्कूल, कृषि विभाग, लोक निर्माण विभाग सहित अन्य सभी सरकारी विभागों में कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में कार्यस्थल से बाहर रहे। दैनिक वेतन भोगी और अनियमित कर्मचारी भी इस हड़ताल में शामिल हुए, जिससे शासन की योजनाओं और कार्यों में बाधा उत्पन्न हुई।

फेडरेशन ने कुल 11 सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें महंगाई भत्ता, DA एरियर्स का GPF खाते में समायोजन, चार स्तरीय समयमान वेतनमान का कार्यान्वयन, लिपिक और शिक्षक वर्ग की वेतन विसंगतियों को दूर करने की रिपोर्ट सार्वजनिक करना, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा लाभ, सहायक शिक्षक और पशु चिकित्सा अधिकारी का तृतीय समयमान वेतनमान, नगर निकाय कर्मचारियों के नियमित मानसिक वेतन और पदोन्नति, अनुकम्पा नियुक्तियों में 100 प्रतिशत छूट, कैशलेस सुविधा, अर्जित अवकाश का नगरीकरण और दैनिक वेतन भोगी व संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण शामिल है। इसके अलावा, फेडरेशन ने सेवा निवृत्त आयु 65 वर्ष करने की भी मांग की।

फेडरेशन का कहना है कि मोदी की गारंटी के अनुसार यह सभी वादे समय पर पूरे होने चाहिए थे। कर्मचारी और अधिकारी सरकार से स्पष्ट जवाब चाहते हैं और यदि उनकी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन किया जाएगा। फेडरेशन ने यह भी चेतावनी दी है कि हड़ताल का असर केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कर्मचारियों द्वारा संचालित योजनाओं और सेवाओं में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है।

इस तीन दिवसीय हड़ताल के माध्यम से कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने यह संदेश दिया है कि मोदी की गारंटी और वादों को पूरी तरह लागू करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। फेडरेशन ने सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को हड़ताल में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया और कहा कि उनकी लड़ाई केवल वेतन और भत्तों की नहीं, बल्कि न्यायसंगत अधिकारों और समानता की है।