अक्ती तिहार पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने की बीज बुआई, जैविक खेती को बढ़ावा देने का दिया संदेश

रायपुर में अक्ती तिहार के अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बीज पूजन कर ट्रैक्टर से बुआई की। इस दौरान किसानों को जैविक खेती अपनाने और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने का संदेश दिया गया।

Apr 21, 2026 - 15:02
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अक्ती तिहार पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने की बीज बुआई, जैविक खेती को बढ़ावा देने का दिया संदेश

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर में अक्ती तिहार के अवसर पर कृषि क्षेत्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें रामविचार नेताम ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मंत्री ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माटी पूजन, बीज पूजन और ठाकुर देवता की पूजा-अर्चना कर कृषि कार्यों की शुरुआत की।

इस अवसर पर कृषि मंत्री ने स्वयं ट्रैक्टर चलाकर सीड ड्रिल मशीन से धान के बीजों की बुआई की और बाड़ी में सब्जियों के बीज भी लगाए। उन्होंने धरती माता से अच्छी फसल की कामना करते हुए गौ माता को चारा भी खिलाया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को उन्नत बीज, खाद और कृषि यंत्र भी वितरित किए गए।

मंत्री नेताम ने अपने संबोधन में किसानों को जैविक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण दोनों प्रभावित होते हैं, इसलिए अब समय है कि हम जैविक खाद और जैव उर्वरकों को अपनाएं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय इसमें तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है।

उन्होंने कहा कि अक्ती तिहार केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है। इस दिन किसान खेती शुरू करने से पहले धरती माता से अनुमति लेते हैं और उनसे क्षमा भी मांगते हैं। यह परंपरा हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने की सीख देती है।

कार्यक्रम में ड्रोन तकनीक को भी बढ़ावा दिया गया। मंत्री ने ड्रोन संचालन में दक्षता हासिल करने वाली “ड्रोन दीदी”  फुलेश्वरी निषाद को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं का इस तरह तकनीक से जुड़ना बेहद प्रेरणादायक है।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि अक्षय तृतीया को छत्तीसगढ़ में अक्ती तिहार के रूप में मनाया जाता है, जिसमें बीज और मिट्टी की पूजा कर खेती की शुरुआत की जाती है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय पिछले कई वर्षों से इस आयोजन को व्यापक स्तर पर आयोजित कर रहा है।

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों के लिए “रासायनिक उर्वरकों का विकल्प” विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने नील हरित काई, अजोला, राइजोबियम, एजोटोबैक्टर और अन्य जैव उर्वरकों के उपयोग की जानकारी दी। साथ ही इनके निर्माण का प्रायोगिक प्रदर्शन भी किया गया।

कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल पारंपरिक कृषि संस्कृति को सहेजने का प्रयास था, बल्कि आधुनिक तकनीक और जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।