केंद्रीय बजट 2026-27 जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं, सरकार की असफलता का दस्तावेज है – विकाश केशरी
केंद्रीय बजट 2026-27 पर जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता विकाश केशरी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे आम जनता, मध्यम वर्ग, किसानों और युवाओं को निराश करने वाला तथा कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाला बजट बताया।
UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा | आज प्रस्तुत किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 पर जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता विकाश केशरी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे जनता की उम्मीदों के विपरीत बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट देश की आम जनता, मध्यम वर्ग, किसानों, युवाओं और गरीबों के लिए नहीं, बल्कि केवल प्रचार और कॉरपोरेट हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया दस्तावेज है।
विकाश केशरी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया बजट एक बार फिर यह साबित करता है कि सरकार जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटी हुई है। बजट में न तो महंगाई से राहत देने के लिए कोई ठोस योजना दिखाई देती है और न ही बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्या के समाधान के लिए कोई प्रभावी रोडमैप प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने मध्यम वर्ग को लेकर कहा कि सरकार ने हर बार की तरह इस बार भी उम्मीदें जगाईं, लेकिन आयकर में कोई वास्तविक और नई राहत नहीं दी गई। बढ़ती महंगाई, बच्चों की शिक्षा, इलाज के खर्च और ईएमआई के दबाव से जूझ रहे मध्यम वर्ग को इस बजट में पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
बेरोजगारी के मुद्दे पर विकाश केशरी ने कहा कि युवाओं के लिए रोजगार सृजन को लेकर बजट में केवल भाषण और घोषणाएं हैं। न तो नई सरकारी भर्तियों की कोई स्पष्ट घोषणा की गई है और न ही निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए कोई ठोस योजना सामने आई है। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया।
महंगाई पर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ईंधन, रसोई गैस, खाद्य सामग्री और रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन बजट में आम आदमी को राहत देने का कोई ठोस उपाय नहीं दिखता।
किसानों को लेकर विकाश केशरी ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के दावे एक बार फिर केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी और खेती की लागत कम करने जैसे अहम मुद्दों पर बजट पूरी तरह मौन है।
उन्होंने बजट को कॉरपोरेट मुखी बताते हुए कहा कि बड़े उद्योगपतियों और निजी निवेश को प्राथमिकता दी गई है, जबकि आम जनता से जुड़ी योजनाएं सीमित कर दी गई हैं। साथ ही बढ़ते कर्ज और राजकोषीय घाटे को लेकर सरकार की दीर्घकालिक रणनीति भी स्पष्ट नहीं है।
अंत में विकाश केशरी ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह विफल रहा है। यह बजट “विकसित भारत” का नहीं, बल्कि जुमलों और प्रचार का बजट है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मध्यम वर्ग को वास्तविक टैक्स राहत दी जाए, बेरोजगारी और महंगाई पर ठोस कदम उठाए जाएं, किसानों के हित में मजबूत फैसले लिए जाएं और जनकल्याण को कॉरपोरेट हितों से ऊपर रखा जाए।