बैठक के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत और चीन के संबंधों को लेकर कहा कि दोनों देश प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन एक-दूसरे के विकास के लिए खतरा नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच सहयोग से विकास के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। जिनपिंग का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच सीमा और व्यापार से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं।
शी जिनपिंग ने भारत-चीन संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को आपसी समझ मजबूत करनी चाहिए और मतभेदों को उचित तरीके से संभालते हुए सहयोग के क्षेत्रों को विस्तार देना चाहिए। बातचीत में सीमा मुद्दे को भी द्विपक्षीय संबंधों के समानांतर आगे बढ़ाने तथा सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया गया।
द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ाने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच सीधी हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने की बात भी सामने आई। कोरोना महामारी और उसके बाद दोनों देशों के बीच उड़ानों में आई कमी के बाद सीधी एयर कनेक्टिविटी को बहाल और विस्तारित करना व्यापार, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ने से आर्थिक और कारोबारी गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद जताई गई।
शी जिनपिंग ने भारत और चीन के संबंधों को केवल प्रतिस्पर्धा के नजरिए से नहीं देखने की बात कही। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग के जरिए साझा विकास की संभावनाओं पर जोर दिया। बैठक में यह संदेश भी सामने आया कि दोनों देश अपने मतभेदों के बावजूद उन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकते हैं, जहां साझा हित मौजूद हैं। विशेष रूप से आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की यह बैठक BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हुई, जहां दोनों नेता अन्य वैश्विक नेताओं के साथ बहुपक्षीय मुद्दों पर भी चर्चा कर रहे हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दो दिन की यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे हैं। BRICS मंच पर भारत और चीन दोनों महत्वपूर्ण सदस्य हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकासशील देशों की भागीदारी तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर दोनों की भूमिका अहम मानी जाती है।
बैठक के दौरान दिए गए संदेशों से संकेत मिलता है कि भारत और चीन अपने संबंधों को स्थिरता और संवाद के माध्यम से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि सीमा, व्यापार और अन्य लंबित मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं, लेकिन शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर संवाद और सहयोग बढ़ाने की पहल को संबंधों में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।