भिलाई के दुर्गा मंदिर के कमरे पर कब्जे का आरोप, पुजारी के रिश्तेदार और पार्षद की भूमिका पर उठे सवाल
भिलाई के कैंप-1 स्थित वार्ड क्रमांक 30 के पुराने दुर्गा मंदिर के एक कमरे पर कब्जे का मामला सामने आया है। पुजारी के निधन के बाद उनके रिश्तेदारों पर कमरा खाली न करने और पार्षद के साथ मिलीभगत कर कब्जा करने का आरोप लगाया गया है। छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच ने जनदर्शन में शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल, दुर्ग l भिलाई के कैंप-1 स्थित वार्ड क्रमांक 30 के पुराने दुर्गा मंदिर के एक कमरे पर कथित कब्जे का मामला सामने आया है। मंदिर समिति और छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच ने आरोप लगाया है कि मंदिर के पुजारी के निधन के बाद उनके रिश्तेदारों ने मंदिर का कमरा खाली करने के बजाय उस पर कब्जा कर लिया। मामले में पार्षद की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
जानकारी के अनुसार वार्ड क्रमांक 30 स्थित यह दुर्गा मंदिर काफी पुराना है। मंदिर में रहने वाले पुजारी अविवाहित थे। बीमारी के दौरान उन्होंने अपने रिश्तेदारों को अपने पास बुला लिया था, जिसकी जानकारी मंदिर समिति को भी थी। उस समय रिश्तेदार पुजारी की देखभाल के उद्देश्य से मंदिर परिसर में रह रहे थे।
आरोप है कि पुजारी के निधन के बाद मंदिर समिति ने संबंधित लोगों से मंदिर का कमरा खाली करने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने कमरा खाली नहीं किया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसके बजाय पुजारी के रिश्तेदारों ने पार्षद सत्यवती जायसवाल के साथ कथित मिलीभगत कर उस कमरे पर कब्जा कर लिया और नगर निगम में उस संपत्ति का टैक्स जमा करना भी शुरू कर दिया।
मंदिर समिति का दावा है कि जिस कमरे पर कब्जे का आरोप लगाया जा रहा है, वह मंदिर में धार्मिक आयोजनों के दौरान कलश रखने के लिए उपयोग किया जाता है। समिति का कहना है कि यह मंदिर की संपत्ति है और इसे खाली कराया जाना आवश्यक है ताकि धार्मिक गतिविधियां पूर्व की तरह संचालित हो सकें।
मामले को लेकर छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच ने जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मंदिर की संपत्ति पर अवैध कब्जे की जांच कर दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ताओं ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत भी संबंधित जानकारी मांगी थी, लेकिन उनका आरोप है कि मांगी गई जानकारी को व्यक्तिगत जानकारी बताते हुए उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है तथा निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
मंदिर समिति का कहना है कि वह मंदिर की संपत्ति को सुरक्षित रखने और संबंधित कमरे को खाली कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वहीं, छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि मंदिर की संपत्ति पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन हो सकेगा।