छोटेडोंगर में आवारा पशुओं का कहर, किसानों की फसल बर्बाद; कार्रवाई की मांग तेज
नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर क्षेत्र में आवारा पशुओं के कारण किसानों की धान की फसल लगातार बर्बाद हो रही है। किसानों ने पशुपालन विभाग और ग्राम पंचायत पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए आवारा पशुओं को पकड़ने, गौठान में रखने तथा पशु मालिकों पर जुर्माना लगाने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. संतोष मजुमदार, नारायणपपुर l बारिश की शुरुआत के साथ ही नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर क्षेत्र में आवारा पशुओं का आतंक बढ़ गया है। खेतों में लगी धान की फसल पर रोजाना आवारा गाय और बैलों का हमला हो रहा है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि पशुपालन विभाग इस गंभीर समस्या के प्रति पूरी तरह उदासीन बना हुआ है, जबकि ग्राम पंचायत की ओर से भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत द्वारा कोटवार के माध्यम से कई बार पशुपालकों को अपने मवेशियों को बांधकर रखने के लिए मुनादी कराई गई, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश पशुपालकों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में आवारा पशु खेतों में पहुंचकर फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं।
दो दिन पहले किसान श्रवण कुमार नाग की धान की फसल भी आवारा पशुओं का शिकार हो गई। श्रवण कुमार नाग, पिता बरातू राम नाग ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले लगभग 16 हजार रुपये का धान बीज खरीदकर अपने खेत में धान का रोपा लगाया था, लेकिन आवारा पशुओं ने पूरी फसल को चौपट कर दिया। उनका कहना है कि मेहनत और लागत दोनों पर पानी फिर गया।
पिछले तीन से चार दिनों से क्षेत्र के कई किसान लगातार मीडिया को फोटो और वीडियो भेज रहे हैं। इन तस्वीरों और वीडियो में दर्जनों आवारा पशु खेतों में घुसकर धान की फसल चरते हुए दिखाई दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि आखिर यह स्थिति कब तक बनी रहेगी और इसके लिए जिम्मेदारी कौन लेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और दूसरी ओर किसान कर्ज लेकर बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री खरीद रहे हैं। दिनभर खेतों में मेहनत करने के बाद रात में भी फसल की रखवाली करनी पड़ती है, लेकिन केवल एक-दो घंटे की चूक में आवारा पशु पूरी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। कई किसानों का दावा है कि उनकी 40 से 50 प्रतिशत तक फसल बर्बाद हो चुकी है।
किसानों का यह भी कहना है कि क्षेत्र में आवारा पशुओं को पकड़कर गौठान में रखने की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। पशु मालिकों पर जुर्माना लगाने, पशुओं को पकड़ने वाली टीम तैनात करने या नियमित निगरानी की भी व्यवस्था नहीं होने से समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
किसानों ने प्रशासन और ग्राम पंचायत से तत्काल विशेष अभियान चलाकर आवारा पशुओं को पकड़ने, प्रत्येक पंचायत में अस्थायी गौठान की व्यवस्था करने तथा लापरवाह पशु मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। किसानों ने यह भी मांग रखी है कि आवारा पशुओं को गौठान में रखा जाए, पशु मालिकों पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाए तथा प्रत्येक पंचायत में रात्रि गश्त और नियमित निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों की फसलों को आगे होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।