भारती विश्वविद्यालय में वृक्षारोपण अभियान और कम्युनिटी सर्विस, पर्यावरण संरक्षण व कानूनी जागरूकता का दिया संदेश

भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग में एनसीसी इकाई ने सघन वृक्षारोपण अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। वहीं विधि संकाय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से ग्राम कुथरेल में कम्युनिटी मेडिएशन पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर ग्रामीणों को कानूनी जानकारी प्रदान की।

Jul 24, 2026 - 14:02
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भारती विश्वविद्यालय में वृक्षारोपण अभियान और कम्युनिटी सर्विस, पर्यावरण संरक्षण व कानूनी जागरूकता का दिया संदेश

UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल, दुर्ग l सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग में विभिन्न सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) इकाई और विधि संकाय द्वारा आयोजित इन कार्यक्रमों ने विद्यार्थियों को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

विश्वविद्यालय परिसर में एनसीसी इकाई द्वारा व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता विकसित करना भी था। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में पर्यावरण के लिए उपयोगी पौधों का रोपण किया गया। पौधारोपण के साथ कैडेटों ने इन पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का संकल्प भी लिया, ताकि लगाए गए पौधे भविष्य में बड़े होकर हरित वातावरण के निर्माण में योगदान दे सकें।

वृक्षारोपण अभियान के दौरान विद्यार्थियों को जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और हरित क्षेत्र के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने जीवन में नियमित रूप से पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण को अपनाए, तो प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। विश्वविद्यालय परिसर को अधिक हरित और स्वच्छ बनाने की दिशा में यह अभियान एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

विश्वविद्यालय का मानना है कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक करना आवश्यक है। इसी सोच के तहत एनसीसी इकाई समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करती रहती है, जिनसे विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और समाज सेवा की भावना विकसित हो।

दूसरी ओर विश्वविद्यालय के विधि संकाय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से ग्राम कुथरेल में कम्युनिटी सर्विस कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय कम्युनिटी मेडिएशन (सामुदायिक मध्यस्थता) रहा। कार्यक्रम में विधि संकाय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को सामुदायिक मध्यस्थता की अवधारणा, उसके महत्व और व्यावहारिक उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने बताया कि कम्युनिटी मेडिएशन के माध्यम से छोटे-छोटे सामाजिक और पारिवारिक विवादों का समाधान आपसी सहमति और संवाद के जरिए किया जा सकता है। इससे लोगों को न्यायालयों के लंबे और खर्चीले कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलती है तथा समाज में सौहार्द और आपसी विश्वास भी मजबूत होता है।

कार्यक्रम में ग्रामीणों ने भी विभिन्न कानूनी और सामाजिक विषयों पर सवाल पूछे, जिनका शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सरल भाषा में समाधान प्रस्तुत किया। इससे ग्रामीणों को अपने अधिकारों और वैकल्पिक विवाद निपटान प्रणाली के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। विधि संकाय के विद्यार्थियों के लिए भी यह कार्यक्रम व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का बेहतर अवसर साबित हुआ।

विश्वविद्यालय लगातार समाज से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। पर्यावरण संरक्षण, विधिक जागरूकता, स्वास्थ्य, स्वच्छता और ग्रामीण विकास जैसे विषयों पर नियमित गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, जिससे शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य समाज के विकास से जुड़ सके।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, जागरूक और संवेदनशील नागरिक तैयार करना भी है। इसी उद्देश्य से सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े कार्यक्रमों को संस्थान की नियमित गतिविधियों का हिस्सा बनाया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और कानूनी जागरूकता जैसे विषय आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकताएं हैं। यदि विद्यार्थी शिक्षा के साथ इन विषयों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी हो सकती है।

भारती विश्वविद्यालय की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि शिक्षा संस्थान यदि सामाजिक उत्तरदायित्व को अपनी कार्य संस्कृति का हिस्सा बना लें, तो वे समाज में जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक विकास की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दे सकते हैं। वृक्षारोपण अभियान और कम्युनिटी मेडिएशन कार्यक्रम जैसे प्रयास न केवल विद्यार्थियों को व्यवहारिक शिक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि समाज और शिक्षा के बीच मजबूत संबंध भी स्थापित करते हैं।